Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में दीर्घ "आ" तथा द्वितीय पद के प्रारंभ में दीर्घ "आ" के मेल से दीर्घ "आ" स्वर बन जाता है।
"हमारे नगर का केंद्रीय विद्यालय अनुशासन और श्रेष्ठ परीक्षा परिणामों के लिए विख्यात है।"
Comprehensive guide to 18 standard Hindi sound-combination rules, formulas, split breakdowns, and authentic textbook examples.
Euphonic combination resulting from two merging vowels (5 major textbook subtypes)
When two homogeneous (similar) short or long vowels (a, i, u, ri) combine, they invariably transform into their corresponding long vowel form (aa, ee, oo, ri).
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में दीर्घ "आ" तथा द्वितीय पद के प्रारंभ में दीर्घ "आ" के मेल से दीर्घ "आ" स्वर बन जाता है।
"हमारे नगर का केंद्रीय विद्यालय अनुशासन और श्रेष्ठ परीक्षा परिणामों के लिए विख्यात है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "अ" और द्वितीय पद के आदि में दीर्घ "आ" के मिलने से दीर्घ "आ" स्वर बन जाता है।
"प्रातःकाल देवालय में घंटा-ध्वनि और शंखनाद से वातावरण अत्यंत पावन हो जाता है।"
When "a" or "aa" is followed by short or long "i/ee", "u/oo", or "ri", they blend into single vowel qualities: "e" (ay), "o", and "ar" respectively.
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "अ" और द्वितीय पद के प्रारंभ में ह्रस्व "इ" के मिलने से गुण रूप "ए" बन जाता है।
"स्वामी विवेकानन्द का बाल्यकाल का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "अ" के बाद ह्रस्व "इ" आने पर दोनों के स्थान पर एकल मात्रा "ए" ( े ) हो जाती है।
"पौराणिक कथाओं में देवराज इन्द्र को देवताओं का अधिपति होने से सुरेन्द्र कहा गया है।"
When "a/aa" is followed by "e/ai", they grow into "ai" (double upper stroke); when followed by "o/au", they grow into "au".
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "आ" और द्वितीय पद के आदि में "ए" के मिलने से दोनों के स्थान पर वृद्धि रूप "ऐ" हो जाता है।
"सत्य और निष्ठा के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को समाज में सदैव सम्मान मिलता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): दीर्घ "आ" के उपरांत "ए" आने से दोनों वर्ण मिलकर वृद्धि स्वर "ऐ" ( ै ) में परिवर्तित हो जाते हैं।
"गुरु ने जैसा उपदेश दिया, शिष्य ने तथैव जीवन में निष्ठापूर्वक आचरण किया।"
When "i/ee", "u/oo", or "ri" is followed by any dissimilar vowel, they convert to the corresponding semi-consonant glides: "y", "v", and "r".
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में ह्रस्व "इ" के बाद असमान स्वर "आ" आने से "इ" का "य्" होकर पूर्व व्यंजन "त्" आधा रह जाता है।
"दुकानदार ने फल, सब्जियाँ, दालें इत्यादि आवश्यक घरेलू सामग्री समय पर पहुँचा दीं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व "इ" के बाद असमान स्वर "अ" आने पर "इ" का "य्" हो जाता है और पूर्व व्यंजन आधा होकर "अत्यधिक" बनता है।
"ग्रीष्मकाल में अत्यधिक परिश्रम करने से शरीर में जल की कमी हो सकती है।"
When diphthongs "e", "ai", "o", "au" are followed by any dissimilar vowel, they break down into "ay", "aay", "av", and "aav" phonetic sequences.
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "ए" के बाद भिन्न स्वर "अ" आने पर "ए" का "अय्" हो जाता है, जिससे न् + अय् + अन मिलकर नयन बनता है।
"करुणा से भरे हुए नयन बिना बोले ही अंतर्मन की सारी व्यथा बयां कर देते हैं।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "ए" के उपरांत भिन्न स्वर "अ" आने पर "ए" का विकार "अय्" होता है (श् + अय् + अन = शयन)।
"दिनभर के मानसिक तनाव और शारीरिक थकान के उपरांत शांत शयन कक्ष में गहरी नींद आई।"
Sound transformations occurring when consonants meet vowels or other consonants
When the first unvoiced consonant of any class (k, ch, t, t, p) meets a voiced sound (3rd/4th consonant, semi-vowel, h, or vowel), it softens into the 3rd consonant of its own class (g, j, d, d, b).
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में स्थित क-वर्ग के प्रथम वर्ण "क्" के बाद स्वर "अ" आने पर "क्" अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण "ग्" में बदल जाता है।
"जैन धर्म में वस्त्र त्याग कर दिशाओं को ही वस्त्र मानने वाले मुनियों को दिगम्बर कहा जाता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "क्" के बाद दीर्घ स्वर "ई" आने पर क-वर्ग का प्रथम वर्ण "क्" अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण "ग्" में परिवर्तित हो जाता है।
"वाणी और विद्या के अधिष्ठाता होने के कारण महर्षि को वागीश की उपाधि प्रदान की गई।"
When the first consonant (k, t, t, p) encounters a nasal consonant (usually n or m), it assimilates into the 5th nasal consonant of its own class.
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में स्थित "क्" के बाद अनुनासिक वर्ण "म्" आने पर "क्" अपने ही वर्ग के पाँचवें वर्ण (अनुनासिक) "ङ्" में बदल जाता है।
"प्राचीन भारतीय संस्कृत वाङ्मय ज्ञान-विज्ञान, दर्शन और मानवीय संवेदनाओं का अक्षय भंडार है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंतिम वर्ण "त्" के बाद अनुनासिक वर्ण "न्" आने पर "त्" अपने वर्ग के पाँचवें वर्ण "न्" में बदल जाता है।
"निरंतर कठोर अनुशासन और परिश्रम करने वाले युवा जीवन के हर क्षेत्र में उन्नति प्राप्त करते हैं।"
Dental 't' is highly assimilative: it converts directly into double forms (chch, jj, tt, dd, ll), or mutually transforms with 'sh' to 'chchh' and with 'h' to 'ddh'.
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में स्थित "त्" के बाद "च" आने पर "त्" भी "च्" में परिवर्तित हो जाता है।
"भाषा शिक्षण में वर्णों का शुद्ध और स्पष्ट उच्चारण अत्यंत आवश्यक माना गया है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंत में "त्" के बाद "ज" आने पर "त्" भी "ज्" में बदल जाता है।
"सज्जन पुरुष विपत्ति के समय भी अपने धर्म, सत्य और मर्यादा का परित्याग नहीं करते हैं।"
When a short vowel (a, i, u, ri) or long 'aa' is followed by 'chh', a connecting half 'ch' is automatically inserted before the 'chh'.
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व स्वर "अ" के बाद "छ" वर्ण आने पर दोनों के बीच आधे "च्" का स्वतः आगम हो जाता है।
"पिंजरे से मुक्त होते ही पक्षी स्वच्छंद होकर नीले आकाश में अपनी उड़ान भरने लगा।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): ह्रस्व स्वर "इ" के बाद "छ" आने पर दोनों के मध्य आधे "च्" का आगम हो जाता है।
"लेखक ने अपनी नई पुस्तक के तृतीय परिच्छेद में समाज के ज्वलंत प्रश्नों की विवेचना की है।"
When 'm' is followed by a stop consonant, it transforms into an anusvara (dot) or that class's nasal; before semi-vowels/sibilants, it strictly turns into an anusvara; before 'm', it doubles as 'mm'.
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद के अंतिम वर्ण "म्" के बाद ऊष्म व्यंजन "स" आने पर "म्" सदैव अनुस्वार (ं) में परिवर्तित हो जाता है।
"महापुरुषों का विचार है कि यह संसार कर्मक्षेत्र है जहाँ प्रत्येक प्राणी को अपने कर्मों का फल मिलता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): "म्" के बाद क-वर्ग का वर्ण "क" आने पर "म्" अनुस्वार (ं) अथवा उस वर्ग के पंचमाक्षर "ङ्" में बदल जाता है।
"दृढ़ संकल्प और निरंतर अभ्यास से कोई भी कठिन परीक्षा सरलता से उत्तीर्ण की जा सकती है।"
When the dental nasal 'n' follows 'ri', 'r', or 'sh' within a word (even across intervening vowels, guttural or labial consonants), it assimilates into the retroflex nasal 'na'.
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): प्रथम पद में "र्" वर्ण के प्रभाव से द्वितीय पद का दन्त्य व्यंजन "न्" मूर्धन्य वर्ण "ण्" में बदल जाता है।
"सच्ची लगन और ईमानदारी से किए गए श्रम का परिणाम सदैव सुखद और फलदायी होता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): उपसर्ग "प्र" में स्थित "र्" के प्रभाव से उत्तर पद का अंतिम दन्त्य व्यंजन "न्" मूर्धन्य "ण्" में बदल जाता है।
"न्यायालय में न्याय की स्थापना के लिए ठोस साक्ष्य और प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।"
When dental 's' (स्) is preceded by any vowel other than 'a' or 'aa' (such as 'i' or 'u'), it transforms into the retroflex sibilant 'sh' (ष्).
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): दन्त्य वर्ण "स्" से पूर्व "अ/आ" से भिन्न स्वर "इ" होने के कारण "स्" मूर्धन्य वर्ण "ष्" में परिवर्तित हो जाता है।
"प्राचीन काल में राजाओं के राजतिलक के समय विधि-विधान से पावन नदियों के जल से अभिषेक किया जाता था।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): उपसर्ग "वि" के ह्रस्व "इ" के बाद "स" आने पर दन्त्य "स्" मूर्धन्य "ष्" में रूपांतरित हो जाता है।
"धैर्यवान व्यक्ति जीवन की विषम से विषम परिस्थितियों में भी अपना मानसिक संतुलन नहीं खोता।"
Aspirate mutation when visarga combines with succeeding vowels or consonants
When a visarga (h) is preceded by 'a' and followed by 'a' or any voiced consonant (3rd/4th/5th letter, semi-vowels, or h), the visarga mutates into the vowel 'o'.
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "अ" स्वर होने तथा विसर्ग के बाद अंतःस्थ व्यंजन "र" आने पर विसर्ग "ओ" ( ो ) की मात्रा में बदल जाता है।
"ईश्वर के आशीर्वाद और माता-पिता के सहयोग से विद्यार्थी का उच्च शिक्षा प्राप्त करने का मनोरथ पूर्ण हुआ।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "अ" स्वर होने तथा विसर्ग के उपरांत अंतःस्थ "व" आने पर विसर्ग का विकार होकर "ओ" बन जाता है।
"प्रातःकाल शांत सरोवर के स्वच्छ जल में खिलते हुए श्वेत और रक्ताभ कमल मन मोह लेते हैं।"
When a visarga preceded by any vowel other than 'a/aa' is followed by a vowel or voiced consonant, the visarga turns into 'r' (often sitting as a reph above the next letter).
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "अ/आ" से भिन्न स्वर "इ" होने तथा बाद में सघोष व्यंजन "ध" आने पर विसर्ग "र्" (रेफ) में बदल जाता है।
"सच्चा धर्म वही है जो निर्धन और असहाय व्यक्तियों की सहायता के लिए प्रेरित करता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "उ" स्वर होने तथा बाद में प-वर्ग का तीसरा वर्ण "ब" आने पर विसर्ग "र्" (रेफ) बन जाता है।
"किसी भी सबल व्यक्ति को अपने बाहुबल का दुरुपयोग दुर्बल लोगों को सताने के लिए नहीं करना चाहिए।"
When a visarga is followed by palatal unvoiced consonants 'ch', 'chh', or 'sh', it adapts into the half palatal sibilant 'sh' (श्).
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद तालव्य व्यंजन "च" आने पर विसर्ग तालव्य वर्ण आधे "श्" में बदल जाता है।
"हिमालय अपनी विशाल और गगनचुंबी चोटियों के साथ सदियों से निश्चल भाव से प्रहरी बनकर खड़ा है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के उपरांत "च" वर्ण आने से विसर्ग का विकार होकर तालव्य आधा "श्" बन जाता है।
"वार्षिक परीक्षा की संपूर्ण तैयारी समय पर पूर्ण कर लेने के बाद विद्यार्थी निश्चिंत हो गया।"
When a visarga preceded by 'i' or 'u' is followed by velar, retroflex, or labial unvoiced stops (k, kh, t, th, p, ph), it mutates into the retroflex sibilant 'sh' (ष्).
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "इ" स्वर होने तथा बाद में "क" वर्ण आने पर विसर्ग मूर्धन्य वर्ण आधे "ष्" में बदल जाता है।
"बच्चों का निष्कपट और निश्छल स्वभाव प्रत्येक व्यक्ति के मन में आनंद का संचार कर देता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग से पूर्व "उ" स्वर होने तथा बाद में "ट" वर्ण आने से विसर्ग मूर्धन्य "ष्" बन जाता है।
"रणभूमि में श्रीराम के धनुष की भयानक धनुष्टंकार सुनते ही राक्षसी सेना में भगदड़ मच गई।"
When a visarga is followed by dental stops 't', 'th', or dental sibilant 's', it converts into the dental half 's' (स्).
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद दन्त्य व्यंजन "त" आने पर विसर्ग दन्त्य वर्ण आधे "स्" में बदल जाता है।
"भारतीय शिष्टाचार में हाथ जोड़कर नमस्ते करना आदर और विनम्रता का सर्वोच्च प्रतीक माना गया है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद दन्त्य वर्ण "त" आने पर विसर्ग का आधा दन्त्य "स्" बन जाता है।
"अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प के बल पर पर्वतारोही ने दुस्तर हिमाच्छादित पर्वत को पार कर लिया।"
When a visarga followed by 'r' drops out, its preceding short vowel elongates into a long vowel (i → ee, u → oo). Alternatively, when preceded by 'a/aa' and followed by a dissimilar vowel, the visarga simply drops without vowel alteration.
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" वर्ण आने पर विसर्ग का लोप हो जाता है तथा पूर्ववर्ती ह्रस्व स्वर "इ" दीर्घ "ई" ( ी ) में बदल जाता है।
"नियमित योगाभ्यास और संतुलित सात्विक आहार शरीर को स्वस्थ और नीरोग बनाए रखता है।"
Grammar Rule & Principle (व्याकरण नियम व सूत्र): विसर्ग के बाद "र" आने से विसर्ग लुप्त हो जाता है और पूर्ववर्ती ह्रस्व "इ" दीर्घ होकर "नी" बन जाता है।
"कला और साहित्य से विहीन मनुष्य का जीवन सर्वथा नीरस और प्रेरणाहीन हो जाता है।"
स्वर, व्यंजन एवं विसर्ग संधि के नियमों, सूत्रों व विच्छेद उदाहरणों से जुड़े 133 सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर।
Showing 1–15 of 133 questions
JSON-LD Schema.org FAQPage Enabledउत्तर: दो अत्यंत निकटवर्ती वर्णों (ध्वनियों) के स्वाभाविक मेल से उत्पन्न होने वाले ध्वनि-विकार (परिवर्तन) को संधि (Phonetic Euphony / Combination) कहते हैं।
प्रमुख उदाहरण एवं विकार:
• हिम + आलय: म्(अ) + आ = हिमालय (स्वर विकार)
• उत् + लास: त् + ल = उल्लास (व्यंजन विकार)
• निः + धन: ः + ध = निर्धन (विसर्ग विकार)
In English: Sandhi is the euphonious combination of adjacent sounds (phonemes) at word boundaries that causes a phonetic transformation.
उत्तर: संधि और समास हिंदी व्याकरण के दो भिन्न संरचनात्मक घटक हैं:
संधि (Sandhi):
• दो वर्णों (ध्वनियों) का मेल है।
• इसमें ध्वनि-विकार अनिवार्य है।
• अलग करने की क्रिया को संधि विच्छेद कहते हैं।
• उदा: देव + आलय = देवालय
समास (Samas):
• दो पदों (शब्दों) का मेल है।
• इसमें कारक चिह्नों (विभक्ति) का लोप होता है।
• अलग करने की क्रिया को समास विग्रह कहते हैं।
• उदा: रसोई के लिए घर = रसोईघर
उत्तर: वर्णों के संयोजन स्वरूप के आधार पर संधि के ३ मुख्य भेद होते हैं:
• १. स्वर संधि (Vowel Sandhi): जब स्वर वर्ण का स्वर वर्ण से मेल हो (उदा: विद्या + अर्थी = विद्यार्थी)। इसके ५ प्रसिद्ध उपभेद हैं।
• २. व्यंजन संधि (Consonant Sandhi): जब व्यंजन के बाद स्वर या व्यंजन आने से परिवर्तन हो (उदा: दिक् + गंज = दिग्गज)।
• ३. विसर्ग संधि (Visarga Sandhi): जब विसर्ग (ः) के पश्चात स्वर या व्यंजन आने से विसर्ग में परिवर्तन हो (उदा: निः + उपाय = निरुपाय)।
उत्तर: संधि युक्त पद के वर्णों को अलग-अलग करके उसकी मूल व्याकरणिक अवस्था में लाने की विधि को संधि विच्छेद (Word Splitting) कहते हैं।
सटीक विच्छेद का स्वर्णिम नियम:
• विच्छेद के पश्चात प्राप्त दोनों पद (प्रथम पद का अंतिम वर्ण व द्वितीय पद का प्रथम वर्ण) सार्वजनिक रूप से सार्थक व मानक होने चाहिए।
• शुद्ध: गिरीश = गिरि (पर्वत) + ईश (स्वामी)
• अशुद्ध: गिरि + इश (इश कोई सार्थक पद नहीं है, 'ईश' मानक है)।
उत्तर: स्वर संधि के ५ उपभेद और उन्हें १ सेकंड में पहचानने की अचूक परीक्षा ट्रिक:
उत्तर: जब दो सवर्ण (समान जाति के) स्वर परस्पर पास आते हैं, तो उनका संयुक्त रूप दीर्घ स्वर हो जाता है (संस्कृत सूत्र: अकः सवर्णे दीर्घः):
• अ / आ + अ / आ = आ: धर्म + अर्थ = धर्मार्थ | विद्या + आलय = विद्यालय
• इ / ई + इ / ई = ई: गिरि + ईश = गिरीश | मुनि + इन्द्र = मुनीन्द्र
• उ / ऊ + उ / ऊ = ऊ: गुरु + उपदेश = गुरूपदेश | लघु + ऊर्मि = लघूर्मि
उत्तर: जब पूर्व पद के अंत में अ या आ हो और उत्तर पद के आरंभ में इ/ई, उ/ऊ या ऋ आए, तो यह रूपांतरण गुण स्वर संधि कहलाता है:
• अ/आ + इ/ई = ए (े): नर + ईश = नरेश | भारत + इन्दु = भारतेन्दु
• अ/आ + उ/ऊ = ओ (ो): ज्ञान + उपदेश = ज्ञानोपदेश | जल + ऊर्मि = जलोर्मि
• अ/आ + ऋ = अर् (र्): देव + ऋषि = देवर्षि | वर्षा + ऋतु = वर्षर्तु
उत्तर: जब अ / आ के पश्चात ए / ऐ आने पर 'ऐ' तथा ओ / औ आने पर 'औ' में वृद्धि हो जाए, तो उसे वृद्धि संधि कहते हैं:
• अ/आ + ए/ऐ = ऐ (ै): मत + ऐक्य = मतैक्य | तथा + एव = तथैव
• अ/आ + ओ/औ = औ (ौ): दंत + ओष्ठ = दंतौष्ठ | महा + औषधि = महौषधि
उत्तर: जब इ/ई, उ/ऊ या ऋ के बाद कोई भी विजातीय (भिन्न) स्वर आता है, तो पूर्व स्वर क्रमशः य्, व्, र् में बदल जाता है (संस्कृत सूत्र: इको यणचि):
• इ/ई + भिन्न स्वर = य्: यदि + अपि = यद्यपि | प्रति + एक = प्रत्येक
• उ/ऊ + भिन्न स्वर = व्: मधु + आलय = मध्वालय | गुरु + आज्ञा = गुर्वाज्ञा
• ऋ + भिन्न स्वर = र्: पितृ + आदेश = पित्रादेश | मातृ + इच्छा = मात्रिच्छा
उत्तर: जब ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई स्वर आता है, तो उनके स्थान पर क्रमशः अय्, आय्, अव्, आव् का आदेश होता है:
• ए + स्वर = अय्: ने + अन = नयन | शे + अन = शयन
• ऐ + स्वर = आय्: गै + इका = गायिका | नै + अक = नायक
• ओ + स्वर = अव्: पो + इत्र = पवित्र | भो + अन = भवन
• औ + स्वर = आव्: पौ + अन = पावन | नौ + इक = नाविक
उत्तर: व्यंजन के साथ किसी स्वर अथवा व्यंजन के परस्पर मेल से होने वाले ध्वनि-विकार को व्यंजन संधि (Consonant Sandhi) कहते हैं:
• १ से ३ का नियम: प्रथम वर्ण तीसरे में बदलता है (क्→ग्, त्→द्; जैसे: दिक् + अम्बर = दिगम्बर)।
• १ से ५ का नियम: अनुनासिक व्यंजन से पहले प्रथम वर्ण पंचमाक्षर बनता है (जैसे: वाक् + मय = वाङ्मय, जगत् + नाथ = जगन्नाथ)।
• 'त्' के विशेष नियम: त् का मेल च, ज, ट, ल आदि से होने पर द्वित्व बनता है (जैसे: उत् + चारण = उच्चारण, उत् + लास = उल्लास)।
उत्तर: विसर्ग (ः) के पश्चात किसी स्वर अथवा व्यंजन के आगमन से विसर्ग में होने वाले रूपांतरण को विसर्ग संधि कहते हैं:
• विसर्ग का 'ओ': मनः + हर = मनोहर | पयः + द = पयोद
• विसर्ग का 'र्': निः + बल = निर्बल | दुः + आत्मा = दुरात्मा
• विसर्ग का 'श् / ष् / स्': निः + शुल्क = निश्शुल्क | निः + पाप = निष्पाप | नमः + ते = नमस्ते
उत्तर: 'विद्यालय' का प्रामाणिक संधि विच्छेद विद्या + आलय है।
• संधि का भेद: दीर्घ स्वर संधि
• लागू नियम/सूत्र: आ + आ मिलकर दीर्घ "आ" बनता है (अकः सवर्णे दीर्घः)।
• वाक्य प्रयोग: "ज्ञान और धर्म के समन्वय से ही जीवन में विद्यालय की सार्थकता सिद्ध होती है।"
Exam Fact: यह विच्छेद CBSE बोर्ड कक्षा 10/12, CTET, REET और राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में सर्वाधिक पूछा गया है।
उत्तर: 'हिमालय' का प्रामाणिक संधि विच्छेद हिम + आलय है।
• संधि का भेद: दीर्घ स्वर संधि
• लागू नियम/सूत्र: अ + आ मिलकर दीर्घ "आ" बनता है।
• वाक्य प्रयोग: "ज्ञान और धर्म के समन्वय से ही जीवन में हिमालय की सार्थकता सिद्ध होती है।"
Exam Fact: यह विच्छेद CBSE बोर्ड कक्षा 10/12, CTET, REET और राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में सर्वाधिक पूछा गया है।
उत्तर: 'महात्मा' का प्रामाणिक संधि विच्छेद महा + आत्मा है।
• संधि का भेद: दीर्घ स्वर संधि
• लागू नियम/सूत्र: आ + आ के मेल से दीर्घ "आ" बनता है।
• वाक्य प्रयोग: "ज्ञान और धर्म के समन्वय से ही जीवन में महात्मा की सार्थकता सिद्ध होती है।"
Exam Fact: यह विच्छेद CBSE बोर्ड कक्षा 10/12, CTET, REET और राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में सर्वाधिक पूछा गया है।
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