Achha ↔ बुरा
जीवन में अच्छा और बुरा समय दोनों आते हैं, किंतु धैर्यवान व्यक्ति कभी विचलित नहीं होता।
बुरा संग मनुष्य की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है, जबकि अच्छा संग जीवन को संवारता है।
अक्षर 'अ' से प्रारंभ होने वाले कुल 457 विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 1–50):
Achha ↔ बुरा
जीवन में अच्छा और बुरा समय दोनों आते हैं, किंतु धैर्यवान व्यक्ति कभी विचलित नहीं होता।
बुरा संग मनुष्य की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है, जबकि अच्छा संग जीवन को संवारता है।
Ameer ↔ गरीब
न्याय के दरबार में अमीर और गरीब दोनों के लिए कानून एक समान है।
गरीब व्यक्ति भी अपने स्वाभिमान और ईमानदारी के बल पर समाज में धनी से अधिक सम्मान पाता है।
Uchit ↔ अनुचित
बुद्धिमान व्यक्ति उचित और अनुचित का भेद भली-भाँति समझते हैं।
अनुचित साधनों से प्राप्त सफलता क्षणिक होती है, उचित परिश्रम ही स्थायी यश दिलाता है।
Yogya ↔ अयोग्य
योग्य प्रशासक कठिन कार्य भी संभाल लेता है, जबकि अयोग्य व्यक्ति आसान काम भी बिगाड़ देता है।
अयोग्य व्यक्ति को महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व सौंपना संस्था को संकट में डाल देता है।
Samarth ↔ असमर्थ
समर्थ लोगों को समाज के असमर्थ और दुर्बल वर्ग की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।
असमर्थ होने पर भी जो दूसरों की भलाई की भावना रखता है, उसका संकल्प कभी व्यर्थ नहीं जाता।
Shuddh ↔ अशुद्ध
शुद्ध जल स्वास्थ्यवर्धक होता है जबकि अशुद्ध पानी अनेक बीमारियों का कारण बनता है।
अशुद्ध विचारों को मन से बाहर निकालना ही साधना और आत्मशुद्धि का प्रथम चरण है।
Pavitra ↔ अपवित्र
मंदिर का वातावरण पवित्र होता है, किसी भी कुकृत्य से उसे अपवित्र न करें।
अपवित्र भावनाएं व्यक्ति के आंतरिक तेज को क्षीण कर देती हैं, जबकि पवित्र विचार उसे आलोकित करते हैं।
Spasht ↔ अस्पष्ट
वक्ता के विचार बिल्कुल स्पष्ट थे, उनमें कोई अस्पष्ट संकेत नहीं था।
अस्पष्ट निर्देश भ्रम उत्पन्न करते हैं, इसलिए संवाद सदा स्पष्ट और पारदर्शी होना चाहिए।
Pratyaksh ↔ अप्रत्यक्ष
प्रत्यक्ष प्रमाण के सामने परोक्ष या अप्रत्यक्ष तर्कों का कोई मूल्य नहीं रह जाता।
माता-पिता का स्नेह अप्रत्यक्ष रूप से हर संकट में हमारी रक्षा करता है।
Upasthit ↔ अनुपस्थित
समारोह में मुख्य अतिथि उपस्थित थे, किंतु कुछ प्रमुख वक्ता अनुपस्थित रहे।
कक्षा में अनुपस्थित रहने से छात्र महत्वपूर्ण पाठ के ज्ञान से वंचित रह जाता है।
Drishya ↔ अदृश्य
नेत्रों से दृश्य जगत का सौंदर्य देखा जा सकता है, किंतु ईश्वर की शक्ति अदृश्य रहती है।
वायु यद्यपि अदृश्य है, किंतु इसका स्पंदन और जीवनदायिनी शक्ति हर श्वास में प्रत्यक्ष है।
Gyaat ↔ अज्ञात
वैज्ञानिक ज्ञात तथ्यों के आधार पर अज्ञात रहस्यों की खोज में निरंतर जुटे रहते हैं।
अज्ञात भय से भयभीत होने के बजाय सत्य का ज्ञान प्राप्त कर उसका सामना करना चाहिए।
Sambhav ↔ असंभव
दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम से असंभव कार्य भी संभव बन जाते हैं।
कठिन परिश्रम और अटूट आत्मविश्वास से असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी संभव हो जाते हैं।
Aavashyak ↔ अनावश्यक
विद्यार्थी को केवल आवश्यक पुस्तकों पर ध्यान देना चाहिए और अनावश्यक सामग्री से बचना चाहिए।
अनावश्यक व्यय और चिंताओं से बचकर ही मनुष्य सुखी और शांत जीवन व्यतीत कर सकता है।
Upayogi ↔ अनुपयोगी
समय का सदुपयोग जीवन को उपयोगी बनाता है जबकि आलस्य इसे अनुपयोगी कर देता है।
अनुपयोगी समझकर फेंकी गई वस्तुएं भी पुनर्चक्रण द्वारा मूल्यवान बन जाती हैं।
Uttam ↔ अधम
चंदन का वृक्ष उत्तम प्रकृति का प्रतीक है, सर्पों के लिपटने पर भी वह अधम नहीं बनता।
अधम कर्म करने वाला व्यक्ति समाज में घृणा का पात्र बनता है और आत्मसम्मान खो बैठता है।
Praacheen ↔ अर्वाचीन
प्राचीन काल के ऋषि-मुनियों का ज्ञान आज के अर्वाचीन विज्ञान से भी कहीं आगे था।
अर्वाचीन काल की आधुनिक तकनीकें प्राचीन ज्ञान के साथ मिलकर नवक्रांति ला रही हैं।
Shaant ↔ अशांत
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
अशांत मन कभी भी सत्य का निर्णय नहीं ले पाता, इसलिए ध्यान द्वारा शांति पाना आवश्यक है।
Nashwar ↔ अनश्वर
यह भौतिक शरीर नश्वर है, किंतु इसके भीतर स्थित चेतना अनश्वर और अमर है।
पार्थिव देह नश्वर है, किंतु उसमें विद्यमान आत्मतत्व अनश्वर और अविनाशी है।
Sthaayi ↔ अस्थायी
सच्चे मित्र स्थायी संबल बनते हैं, जबकि झूठे साथी केवल अस्थायी लाभ के लिए जुड़ते हैं।
संसार के समस्त सुख-दुख अस्थायी हैं, इसलिए सुख में अहंकार और दुख में विलाप अनुचित है।
Sadhu ↔ असाधु
साधु पुरुषों का सानिध्य पापों को हरता है जबकि असाधु संगति पतन की ओर ले जाती है।
असाधु प्रवृत्ति के लोग दूसरों के पतन में ही अपना हित तलाशते हैं।
Shisht ↔ अशिष्ट
शिष्ट आचरण सभ्य समाज की पहचान है, अशिष्ट बातें किसी को शोभा नहीं देतीं।
अशिष्ट व्यवहार किसी भी सुसंस्कृत सभा में स्वीकार्य नहीं होता, शिष्टाचार ही सम्मान दिलाता है।
Sabhya ↔ असभ्य
सभ्य राष्ट्र विवादों का हल शांतिपूर्ण संवाद से निकालते हैं, असभ्य युद्ध से नहीं।
असभ्य वाणी बोलने से अपनी ही हीनता प्रकट होती है, इसलिए मधुर और सभ्य बोलें।
Udaar ↔ अनुदार
उदार हृदय वाले लोग सर्वकल्याण सोचते हैं जबकि अनुदार व्यक्ति केवल अपने स्वार्थ तक सीमित रहते हैं।
अनुदार दृष्टिकोण समाज को बांटता है, जबकि उदार हृदय सबको अपना बना लेता है।
Anukool ↔ प्रतिकूल
अनुकूल परिस्थितियों में तो सभी सफल होते हैं, पर प्रतिकूल समय में टिकने वाला ही सच्चा वीर है।
प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य न खोना ही सच्चे साहसी और बुद्धिमान की पहचान है।
Aseem ↔ ससीम
ईश्वर की अनुकंपा असीम होती है, जिसकी तुलना ससीम मानवीय क्षमताओं से नहीं की जा सकती।
मनुष्य की बुद्धि ससीम है, जबकि यह ब्रह्मांड असीम और अनंत रहस्यों से परिपूर्ण है।
Anant ↔ सांत
नीला आकाश अनंत प्रतीत होता है, जबकि धरती की सीमाएं सांत और निश्चित हैं।
भौतिक संसार का विस्तार सांत है, जबकि चेतना का परमात्मा रूप अनंत है।
Poorna ↔ अपूर्ण
पूर्ण समर्पण से किया गया कार्य सफल होता है जबकि अपूर्ण निष्ठा विफलता लाती है।
बिना नैतिक आचरण के कोई भी ज्ञान अपूर्ण और निष्फल रह जाता है।
Asli ↔ नकली
असली हीरे की चमक सदा बनी रहती है, जबकि नकली आभूषण जल्द ही फीके पड़ जाते हैं।
नकली मोतियों की चमक कुछ ही दिनों में फीकी पड़ जाती है, असली रत्न सदा दमकता है।
Kathit ↔ अकथित
कथित शब्दों की अपेक्षा अकथित मौन कभी-कभी अधिक गहरा संदेश दे जाता है।
अनेक गहरे भाव अकथित रहकर भी आंखों की भाषा से स्वतः व्यक्त हो जाते हैं।
Pramaanik ↔ अप्रामाणिक
इतिहासकारों ने केवल प्रामाणिक अभिलेखों को स्वीकार किया और अप्रामाणिक दंतकथाओं को खारिज कर दिया।
अप्रामाणिक सूचनाओं पर विश्वास करने से समाज में व्यर्थ की अफवाहें और अशांति फैलती है।
Swabhavik ↔ अस्वाभाविक
दुख में आंसू बहना स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, कठोर होकर भावहीन बने रहना अस्वाभाविक है।
अस्वाभाविक व्यवहार से बनावटीपन झलकता है, सहजता ही व्यक्ति को गरिमा प्रदान करती है।
Kushal ↔ अकुशल
कुशल कारीगर बारीक नक्काशी कर लेता है जबकि अकुशल मजदूर पत्थर भी ठीक से नहीं तराश पाता।
अकुशल हाथों में बहुमूल्य औजार भी नष्ट हो जाते हैं, कुशलता अभ्यास से ही आती है।
Daksha ↔ अदक्ष
दक्ष शल्य-चिकित्सक जटिल ऑपरेशन सरलता से कर देता है, नए व अदक्ष को सावधानी रखनी होती है।
अदक्ष कारीगर को समुचित प्रशिक्षण देकर निपुण बनाया जा सकता है।
Praveen ↔ अकुशल
संगीत में प्रवीण गायक सुर को साध लेता है, जिसे नौसिखिया नहीं पकड़ पाता।
अकुशल हाथों में बहुमूल्य औजार भी नष्ट हो जाते हैं, कुशलता अभ्यास से ही आती है।
Nipun ↔ अनिपुण
धनुर्विद्या में निपुण अर्जुन ने लक्ष्य पर अचूक संधान किया।
कला के क्षेत्र में निरंतर साधना ही अनिपुण शिक्षार्थी को कुशल कलाकार बनाती है।
Satya ↔ असत्य
सत्य वचन भले ही कड़वे लगें, पर असत्य मीठा होकर भी पतन कराता है।
असत्य का सहारा लेने वाले को एक झूठ छिपाने के लिए सौ नए झूठ बोलने पड़ते हैं।
Vaastavik ↔ अवास्तविक
वास्तविक स्थिति जाने बिना किसी पर दोषारोपण करना उचित नहीं।
अवास्तविक अपेक्षाएं पालने से अंत में केवल निराशा और पश्चाताप ही हाथ लगता है।
Gyaani ↔ अज्ञानी
ज्ञानी पुरुष सबको आदर देता है, अज्ञानी अहंकार में चूर रहता है।
अज्ञानी को ज्ञान का प्रकाश देकर सही मार्ग पर लाना ही समाज का परम धर्म है।
Alpa ↔ प्रचुर
अल्प ज्ञान खतरनाक होता है, जबकि किसी विषय का प्रचुर ज्ञान आत्मविश्वास देता है।
वर्षा काल में प्रचुर जल मिलने से धरती शस्य-श्यामला और हरी-भरी हो जाती है।
Nyoon ↔ अधिक
खर्च को न्यूनतम रखना चाहिए और बचत को अधिक से अधिक बढ़ाना चाहिए।
किसी भी वस्तु का अधिक उपभोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।
Adhik ↔ कम
अधिक बोलना मूर्खता की निशानी है, कम और सार्थक बोलना बुद्धिमत्ता है।
कम साधनों में भी संतोषपूर्वक जीवन जीने वाला व्यक्ति सदा सुखी रहता है।
Rochak ↔ अरुचिकर
यह पुस्तक इतनी रोचक है कि पाठक को अरुचिकर विषयों में भी रुचि हो जाती है।
अरुचिकर भोजन भी भूख लगने पर स्वादिष्ट और तृप्तिकारी प्रतीत होने लगता है।
Drishyamaan ↔ अदृश्यमान
क्षितिज पर दृश्यमान पर्वत घने बादलों के आते ही अदृश्यमान हो गया।
सूक्ष्मदर्शी के बिना अदृश्यमान जीवाणु भी जल में उपस्थित रहकर रोग फैला सकते हैं।
Sushikshit ↔ अशिक्षित
सुशिक्षित समाज में कुप्रथाओं का कोई स्थान नहीं होता, अशिक्षित लोग ही अंधविश्वास में फंसते हैं।
अशिक्षित समाज को विद्या का प्रकाश देकर ही राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति संभव है।
Shikshit ↔ अशिक्षित
एक शिक्षित नागरिक अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति भी सचेत रहता है।
अशिक्षित समाज को विद्या का प्रकाश देकर ही राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति संभव है।
Shraant ↔ अश्रांत
दिनभर के परिश्रम से श्रांत मजदूर रात्रि में गहरी नींद सोता है।
अश्रांत परिश्रमी व्यक्ति बिना थके अपने निर्धारित लक्ष्य की दिशा में अग्रसर रहता है।
Deerghaayu ↔ अल्पायु
बुजुर्गों का आशीर्वाद होता है — दीर्घायु भव और यशस्वी बनो।
अल्पायु में ही स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों से संपूर्ण विश्व को आलोकित कर दिया।
Anuraagi ↔ विरागी
संसार का अनुरागी मनुष्य मोह में बंधता है, विरागी संन्यासी मोक्ष की ओर बढ़ता है।
विरागी साधु सांसारिक प्रलोभनों से मुक्त होकर आत्मतत्व के अनुसंधान में लीन रहता है।
Aasakt ↔ अनासक्त
कर्मफल में आसक्त होने के बजाय निष्काम भाव से अनासक्त होकर कर्म करो।
गीता का संदेश है कि कर्म अनासक्त भाव से करो और फल की चिंता मत करो।