Mota ↔ पतला
नियमित व्यायाम करने से मोटा व्यक्ति भी पतला और स्वस्थ हो सकता है।
पतला धागा भी जब मिलकर रस्सी का रूप लेता है तो भारी बोझ उठाने में सक्षम होता है।
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Mota ↔ पतला
नियमित व्यायाम करने से मोटा व्यक्ति भी पतला और स्वस्थ हो सकता है।
पतला धागा भी जब मिलकर रस्सी का रूप लेता है तो भारी बोझ उठाने में सक्षम होता है।
Meetha ↔ कड़वा
मीठे बोल सभी का मन मोह लेते हैं जबकि कड़वे वचन दूसरों को चोट पहुँचाते हैं।
सच्चाई कड़वी औषधि के समान होती है, किंतु अंत में उसका फल मीठा ही निकलता है।
Mahatvapurna ↔ महत्वहीन
बैठक में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई और महत्वहीन मुद्दों को छोड़ दिया गया।
महत्वहीन बातों पर व्यर्थ विवाद करने से बहुमूल्य समय और ऊर्जा नष्ट होती है।
Madhur ↔ कटु
कोयल की मधुर वाणी सबको भाती है जबकि कौवे का कटु स्वर किसी को पसंद नहीं।
कटु वचन तीखे तीर की भांति हृदय को भेद देते हैं, जबकि मधुर वाणी घाव भर देती है।
Teevra ↔ मंद
तीव्र आंधी में विशाल वृक्ष उखड़ गए जबकि मंद समीर में तृण मुस्कुराते रहे।
मंद पवन की शीतल थपकी थके हुए पथिक को शांत विश्राम देती है।
Vidvaan ↔ मूर्ख
विद्वान की संगति विवेक जगाती है जबकि मूर्ख की संगति संकट पैदा करती है।
मूर्ख व्यक्ति को हितकारी उपदेश देना भी व्यर्थ जाता है, जैसे बंजर भूमि में बीज बोना।
Chatur ↔ मूढ़
चतुर व्यापारी लाभ कमा लेता है, जबकि सीधा और मूढ़ ग्राहक अक्सर ठगा जाता है।
मूढ़ स्वभाव का व्यक्ति अपने ही हठ के कारण बार-बार संकट में फंसता है।
Mithya ↔ सत्य
मिथ्या प्रपंच में उलझने के बजाय यथार्थ सत्य को समझना ही बुद्धिमानी है।
सत्य की राह कठिन अवश्य होती है, किंतु अंततः विजय सत्य की ही होती है।
Moodh ↔ ज्ञानी
मूढ़ व्यक्ति क्रोध में अपना ही अहित कर बैठता है, ज्ञानी सदा शांत रहता है।
सच्चा ज्ञानी विनम्रता धारण करता है, क्योंकि ज्ञान अहंकार को विनष्ट कर देता है।
Mukhar ↔ मूक
अन्याय के विरुद्ध मुखर आवाज उठाना जरूरी है, मूक दर्शक बने रहना कायरता है।
अन्याय के समक्ष मूक दर्शक बनकर रहना भी अपराध के भागीदार होने जैसा है।
Mook ↔ वाचाल
मूक होई वाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन — ईश्वर कृपा से गूंगा भी वाचाल हो जाता है।
वाचाल व्यक्ति बिना विचारे बोलकर अक्सर अपनी ही गरिमा घटा लेता है।
Mitbhaashi ↔ वाचाल
मितभाषी नेता के हर शब्द का वजन होता है, वाचाल व्यक्ति की बात कोई गंभीरता से नहीं लेता।
वाचाल व्यक्ति बिना विचारे बोलकर अक्सर अपनी ही गरिमा घटा लेता है।
Mridu ↔ कठोर
मृदु वाणी शत्रु को भी मित्र बना लेती है, जबकि कठोर व्यवहार अपनों को भी दूर कर देता है।
राजा का कठोर दंड देखकर सभासद विस्मित रह गए, किंतु रानी का हृदय अत्यंत कोमल था।
Mukhya ↔ गौण
शिक्षा का मुख्य उद्देश्य चरित्र निर्माण है, केवल उपाधि प्राप्त करना गौण है।
मुख्य उद्देश्य की सिद्धि के लिए गौण बातों पर अधिक समय व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
Karkash ↔ मधुर
कर्कश ध्वनि कानों को चुभती है जबकि मधुर संगीत मन को शांत करता है।
कोयल की मधुर वाणी सबको भाती है जबकि कौवे का कटु स्वर किसी को पसंद नहीं।
Praphulla ↔ म्लान
प्रातःकाल खिलता हुआ प्रफुल्ल कमल मन को भाता है जबकि धूप में वह म्लान हो जाता है।
ग्रीष्म की तीखी धूप में फूलों की कांति म्लान हो जाती है जिसे शाम की ओस संवारती है।
Jeevan ↔ मृत्यु
जीवन और मृत्यु ईश्वर के हाथ में है, मनुष्य का कर्तव्य केवल सत्कर्म करना है।
मृत्यु शाश्वत सत्य है, जो जन्म लेता है उसका अंत निश्चित है।
Janma ↔ मृत्यु
जन्म से कोई महान नहीं होता, व्यक्ति अपने कर्मों से महान बनता है।
मृत्यु शाश्वत सत्य है, जो जन्म लेता है उसका अंत निश्चित है।
Maran ↔ जीवन
जन्म और मरण का चक्र संसार का सनातन नियम है।
जीवन और मृत्यु ईश्वर के हाथ में है, मनुष्य का कर्तव्य केवल सत्कर्म करना है।
Milan ↔ विरह
दीर्घ विरह के पश्चात पुराने मित्रों का मिलन अत्यंत भावुक कर देने वाला था।
काव्य में विरह की वेदना मिलन के सुख को और अधिक गहरा बना देती है।
Maan ↔ अपमान
सज्जन व्यक्ति मान मिलने पर अभिमानी नहीं होते और अपमान होने पर संयम नहीं खोते।
किसी निर्धन का अपमान करना मानवता के विरुद्ध घोर पाप है।
Maalik ↔ नौकर
सच्चा मालिक वही है जो नौकर के श्रम का यथोचित पारिश्रमिक समय पर दे।
नौकर की ईमानदारी देखकर मालिक ने उसे अपने व्यापार का प्रबंधक बना दिया।
Bandhan ↔ मुक्ति
अज्ञानता मनुष्य को बंधनों में जकड़ती है, ज्ञान उसे मुक्ति का मार्ग दिखाता है।
कुरीतियों और अंधविश्वासों से मुक्ति पाकर ही समाज प्रगति कर सकता है।
Maata ↔ पिता
माता का प्रेम संसार में सबसे निस्वार्थ और अनमोल माना गया है।
पिता परिवार का संबल और बालकों के भविष्य के कुशल मार्गदर्शक होते हैं।
Daasata ↔ मुक्ति
दासता से मुक्ति पाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग ने संघर्ष किया।
कुरीतियों और अंधविश्वासों से मुक्ति पाकर ही समाज प्रगति कर सकता है।
Sarvasammati ↔ मतभेद
ग्राम सुधार योजना का प्रस्ताव पंचायत में सभी सदस्यों की सर्वसम्मति से पारित हो गया।
बजट के आवंटन को लेकर समिति के सदस्यों के बीच गहरा मतभेद उभर कर सामने आया।
Mahala ↔ झोपड़ी
राजधानी के भव्य महल में संगमरमर के खंभे और विशाल उद्यान बने हुए थे।
नदी किनारे अपनी छोटी सी झोपड़ी में गरीब मछुआरा सादगी और संतोष से जीवन बिता रहा था।
Pravaasee ↔ मूलनिवासी
उद्योगों में काम करने वाले कई प्रवासी श्रमिक त्योहारों पर अपने पैतृक गांव लौट आते हैं।
अंडमान के द्वीपों पर रहने वाले मूलनिवासी जनजातियों की अपनी विशिष्ट संस्कृति और परंपरा है।
Kasbaa ↔ महानगर
हमारा छोटा सा कस्बा चारों ओर खेतों से घिरा हुआ शांत और सुरक्षित इलाका है।
मुंबई और दिल्ली जैसे विशाल महानगर चौबीसों घंटे दौड़ते रहने वाले आर्थिक केंद्र हैं।
Kaaraavaasa ↔ मुक्ति
गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में दोषी पाए जाने पर उसे पांच वर्ष का कठोर कारावास हुआ।
सजा की अवधि पूरी होने के उपरांत बंदी को जेल से सम्मानपूर्वक मुक्ति मिल गई।
Samudra ↔ मरुस्थल
पृथ्वी का एक छोर अपार जलराशि वाले समुद्र से भरा है तो दूसरा शुष्क मरुस्थल से आच्छादित है।
मरुस्थल में पानी की एक-एक बूंद बहुमूल्य मानी जाती है, जहां दूर-दूर तक केवल रेत ही रेत होती है।
Muhaana ↔ उद्गम
पर्वतों से निकलने वाला नदी का उद्गम संकरा होता है, किंतु समुद्र के निकट उसका मुहाना अत्यंत चौड़ा होता है।
गंगा का उद्गम गंगोत्री हिमनद से होता है और प्रयागराज में उसका त्रिवेणी संगम दर्शनीय है।
Aandhi ↔ मंद समीर
रेत की भयानक आंधी थम जाने के बाद बहने वाला मंद समीर अत्यंत राहतकारी लगा।
आंधी की धूल भरी गर्जना के बाद बहने वाला मंद समीर हर पथिक को असीम राहत देता है।
Megh ↔ धूप
आसमान में काले मेघ छाते ही तेज धूप छिप गई और मौसम सुहाना हो गया।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Van ↔ मरु
हरे-भरे सघन वन वर्षा को आकर्षित करते हैं, जबकि शुष्क मरु में जल की बूंदें तरसती हैं।
वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से मरु को भी हरे-भरे वन में बदला जा सकता है।
Parvat ↔ मैदान
पर्वत पर चढ़ाई जितनी दुष्कर होती है, समतल मैदान में चलना उतना ही सुगम होता है।
विशाल मैदान कृषि और बस्तियों के लिए आदर्श होते हैं, जबकि पर्वत वनों और खनिजों से संपन्न हैं।
Tat ↔ मझधार
नाविक ने यात्रियों को सुरक्षित तट पर उतार दिया और पुनः उफनती मझधार में उतर गया।
सच्चा मित्र वह है जो मझधार में नाव फंसने पर भी साथ न छोड़े और किनारे तक पहुंचाए।
Mareechika ↔ यथार्थ
रेगिस्तान में जल का भ्रम मरीचिका कहलाता है, जिसके पीछे भागने के बजाय यथार्थ को स्वीकारना चाहिए।
रेगिस्तान की छलती मरीचिका के भ्रम से निकलकर यथार्थ को स्वीकारना ही विवेक है।
Prasphutan ↔ मुरझाहट
वसंत में कलियों का प्रस्फुटन होता है और ज्येष्ठ की दोपहरी में फूलों की मुरझाहट देखी जाती है।
पानी मिलते ही मुरझाहट त्यागकर मुरझाए पौधे पुनः लहलहा उठे।
Parvatiya ↔ मैदानी
पर्वतीय क्षेत्रों की जीवनशैली कठोर होती है, जबकि मैदानी इलाकों में सुविधाएं अधिक सुलभ हैं।
मैदानी भाग में नदियों का बहाव धीमा और चौड़ा होता है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में वह तीव्र होता है।
Nirmalta ↔ मलिनता
पर्वतीय झरनों के जल की निर्मलता मन मोह लेती है, जिसे औद्योगिक कचरे की मलिनता से बचाना आवश्यक है।
नदियों में अपशिष्ट बहाने से जल में मलिनता बढ़ जाती है और जलीय जीवन संकट में पड़ जाता है।
Mrit Jwalamukhi ↔ जीवंत ज्वालामुखी
मृत ज्वालामुखी के क्रेटर में समय के साथ वर्षा का जल भरकर सुंदर झील का रूप ले लेता है।
मृत ज्वालामुखी सदियों तक शांत रहता है, जबकि जीवंत ज्वालामुखी से निरंतर लावा निकलता है।
Mitti ↔ चट्टान
नरम मिट्टी में बीज अंकुरित होकर पेड़ बन जाते हैं, जबकि नंगी चट्टान पर हरियाली नहीं उगती।
समुद्र की लहरें विशाल चट्टान से टकराकर लौट जाती हैं, किंतु रेत के टीलों को बहा ले जाती हैं।
Jal-Strot ↔ मरुभूमि
पहाड़ों के प्राकृतिक जलस्रोत घाटी के निवासियों की प्यास बुझाते हैं, जहां मरुभूमि का अभाव है।
मरुभूमि में मीलों तक हरियाली का नामोनिशान नहीं मिलता, जहां केवल कंटीले कैक्टस उगते हैं।
Shasya-Shyaamla ↔ मरुस्थली
नहरों के पानी से राजस्थान की बंजर धरती भी शस्य-श्यामला उपजाऊ भूमि में बदल गई।
मरुस्थली में केवल रेतीले टीले और कंटीली झाड़ियां दृष्टिगोचर होती हैं।
Mamta ↔ निष्ठुरता
माँ की निस्वार्थ ममता हर संतान के लिए संसार का सबसे बड़ा संबल है।
मासूम जीवों पर अत्याचार करना घोर निष्ठुरता का परिचायक है।
Moh ↔ विरक्ति
संतान के प्रति अंधा मोह कभी-कभी उचित और अनुचित का भेद भुला देता है।
संसार की नश्वरता को समझकर साधक के मन में विरक्ति उत्पन्न हो गई।
Matsarya ↔ सौहार्द
मन में मात्सर्य और डाह रखने से मनुष्य अपनी ही शांति खो बैठता है।
पड़ोसियों के बीच आपसी सौहार्द से ही सुखमय जीवन संभव होता है।
Mangal ↔ अमंगल
नववर्ष के अवसर पर सभी ने एक-दूसरे के मंगल की कामना की।
समारोह के बीच अशुभ समाचार सुनकर सबने अमंगल की आशंका जताई।
Mudit ↔ उदास
बच्चों की मीठी बातें सुनकर दादाजी का मन मुदित हो गया।
परीक्षा में मनचाहा फल न मिलने पर वह उदास बैठा रहा।