Shuddh ↔ अशुद्ध
शुद्ध जल स्वास्थ्यवर्धक होता है जबकि अशुद्ध पानी अनेक बीमारियों का कारण बनता है।
अशुद्ध विचारों को मन से बाहर निकालना ही साधना और आत्मशुद्धि का प्रथम चरण है।
अक्षर 'श' से प्रारंभ होने वाले कुल 180 विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 1–50):
Shuddh ↔ अशुद्ध
शुद्ध जल स्वास्थ्यवर्धक होता है जबकि अशुद्ध पानी अनेक बीमारियों का कारण बनता है।
अशुद्ध विचारों को मन से बाहर निकालना ही साधना और आत्मशुद्धि का प्रथम चरण है।
Shreshth ↔ निम्न
सत्कर्म करने वाला व्यक्ति समाज में श्रेष्ठ पद पाता है जबकि दुर्जन निम्न माना जाता है।
निम्न सोच मनुष्य के व्यक्तित्व को संकीर्ण बना देती है, जबकि श्रेष्ठ विचार उसे ऊंचा उठाते हैं।
Shaant ↔ अशांत
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
अशांत मन कभी भी सत्य का निर्णय नहीं ले पाता, इसलिए ध्यान द्वारा शांति पाना आवश्यक है।
Shaktishaali ↔ शक्तिहीन
शक्तिशाली राष्ट्र का दायित्व है कि वह शक्तिहीन पड़ोसियों की संप्रभुता का आदर करे।
बिना नैतिक बल के मनुष्य बाह्य रूप से कितना भी संपन्न हो, आंतरिक रूप से शक्तिहीन रहता है।
Kshanik ↔ शाश्वत
सांसारिक सुख क्षणिक होते हैं, जबकि सत्य और करुणा का आनंद शाश्वत होता है।
सत्य और धर्म का मूल्य शाश्वत है जो युगों के परिवर्तन के बाद भी कभी नहीं मिटता।
Shwet ↔ श्याम
श्वेत हंस और श्याम वर्ण का कौवा दोनों के रंग में गहरा अंतर होता है।
वर्षा ऋतु में आकाश में घिरते श्याम मेघ किसानों के हृदय में हर्ष का संचार करते हैं।
Shisht ↔ अशिष्ट
शिष्ट आचरण सभ्य समाज की पहचान है, अशिष्ट बातें किसी को शोभा नहीं देतीं।
अशिष्ट व्यवहार किसी भी सुसंस्कृत सभा में स्वीकार्य नहीं होता, शिष्टाचार ही सम्मान दिलाता है।
Shikshit ↔ अशिक्षित
एक शिक्षित नागरिक अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति भी सचेत रहता है।
अशिक्षित समाज को विद्या का प्रकाश देकर ही राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति संभव है।
Shraant ↔ अश्रांत
दिनभर के परिश्रम से श्रांत मजदूर रात्रि में गहरी नींद सोता है।
अश्रांत परिश्रमी व्यक्ति बिना थके अपने निर्धारित लक्ष्य की दिशा में अग्रसर रहता है।
Sheelvaan ↔ चरित्रहीन
शीलवान व्यक्ति विपत्ति में भी मर्यादा नहीं छोड़ता।
चरित्रहीन व्यक्ति धन और सत्ता पाकर भी कभी आत्मिक शांति प्राप्त नहीं कर पाता।
Ugra ↔ शांत
उग्र रूप धारण किए बिना भी शांत और सौम्य वाणी से कठिन समस्याओं का समाधान हो सकता है।
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
Aardra ↔ शुष्क
वर्षा ऋतु में वातावरण आर्द्र हो जाता है जिससे कपड़े देर से सूखते हैं।
रेगिस्तान की शुष्क पवन शरीर की नमी को सोख लेती है और प्यास बढ़ा देती है।
Graameen ↔ शहरी
ग्रामीण जीवन की शांति और शुद्ध वायु शहरों की भागदौड़ में नहीं मिलती।
शहरी चकाचौंध में कभी-कभी मनुष्य प्रकृति की सादगी और शांति को भूल बैठता है।
Shahar ↔ गाँव
शहर की चकाचौंध से दूर गाँव की सादगी मन को सुकून देती है।
भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है, जिसे शहरों के विकास के साथ नहीं भूलना चाहिए।
Shikshak ↔ छात्र
कक्षा में शिक्षक ज्ञान प्रदान करते हैं और छात्र एकाग्रता से अध्ययन करते हैं।
अनुशासित छात्र अपने गुरु का आदर कर जीवन में महान ऊंचाइयां छूता है।
Shishya ↔ गुरु
सच्चा शिष्य गुरु द्वारा दिए गए ज्ञान को जनकल्याण में समर्पित करता है।
छंद शास्त्र में गुरु मात्रा का भार दो गिना जाता है जबकि लघु मात्रा का मान एक होता है।
Vakta ↔ श्रोता
कुशल वक्ता अपने विचारों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।
सभामंच पर ओजस्वी वक्ता और ध्यानमग्न श्रोता का सामंजस्य अद्भुत था।
Sharana ↔ निष्कासन
युद्धग्रस्त क्षेत्र से आए असहाय परिवारों को शरण देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
समाज विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर अपराधी का मोहल्ले से निष्कासन कर दिया गया।
Shaharee ↔ देहाती
शहरी जीवन में तकनीकी सुविधाएं प्रचुर मात्रा में हैं परंतु प्रदूषण और भागदौड़ भी अधिक है।
देहाती परिवेश में खुली हवा, हरियाली और परस्पर मेलजोल की आत्मीयता देखने को मिलती है।
Shayana ↔ जागरण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रात्रि में समय पर शयन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
परीक्षा की तैयारी के लिए छात्रों ने पूरी रात जागरण किया और पढ़ाई में जुटे रहे।
Shukla Paksha ↔ कृष्ण पक्ष
हिंदू पंचांग में चंद्रमा की कलाओं के आधार पर शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष निर्धारित होते हैं।
कृष्ण पक्ष में रातें क्रमशः अंधेरी होती जाती हैं, जबकि शुक्ल पक्ष में चांदनी बढ़ती है।
Shikhar ↔ तलहटी
पर्वतारोही तलहटी से कठिन चढ़ाई आरंभ कर अंततः बर्फ से ढके शिखर पर ध्वज फहराते हैं।
पर्वत की तलहटी में घने वन और नदियां बहती हैं, जबकि शिखर निर्जन और हिमच्छादित रहता है।
Greeshm ↔ शीत
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
शीत ऋतु में गुनगुनी धूप का आनंद ग्रीष्म ऋतु की छाया जैसा सुखद प्रतीत होता है।
Ushna ↔ शीतल
रेगिस्तान की उष्ण हवाओं के मध्य शीतल जल का झरना किसी वरदान से कम नहीं लगता।
पर्वतों से बहती शीतल बयार थके हुए यात्रियों की उष्ण थकान को पलभर में हर लेती है।
Tapt ↔ शीतल
तप्त बालू पर नंगे पैर चलना कठिन होता है, जबकि शीतल जलधारा में चलना अत्यंत सुखद है।
पर्वतों से बहती शीतल बयार थके हुए यात्रियों की उष्ण थकान को पलभर में हर लेती है।
Bhaanu ↔ शशि
भानु की प्रखर किरणें संपूर्ण जगत को प्रकाशवान करती हैं, जबकि शशि की किरणें सुखद शीतलता देती हैं।
नीले आकाश में पूर्णिमा का शशि भानु के अस्त होने के उपरांत मनमोहक रूप धर लेता है।
Toofan ↔ शांति
समुद्र में उठे भीषण तूफान के शांत होने पर ही चारों ओर सुखद शांति का वातावरण बना।
भीषण तूफान के थम जाने के बाद फैली गहरी शांति प्रकृति के नवजीवन का संकेत देती है।
Kallol ↔ शांति
पवन के झोंकों से सरिता में कल्लोल होने लगा, जिससे जल की पूर्व शांति भंग हो गई।
भीषण तूफान के थम जाने के बाद फैली गहरी शांति प्रकृति के नवजीवन का संकेत देती है।
Shishir ↔ ग्रीष्म
शिशिर की कंपकंपी छुड़ाने वाली ठंडक के बाद प्रकृति ग्रीष्म की तपन से तपती है।
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
Jwalant ↔ शांत
ज्वालामुखी से निकलता ज्वलंत लावा कुछ दिनों बाद ठंडा होकर शांत चट्टान बन जाता है।
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
Sharad ↔ ग्रीष्म
शरद ऋतु का निर्मल आकाश और शांत रातें ग्रीष्म ऋतु के तपन भरे दिनों से सर्वथा भिन्न हैं।
ग्रीष्म की तीखी तपन के पश्चात आने वाली शीत ऋतु तन और मन दोनों को राहत देती है।
Aardrata ↔ शुष्कता
वर्षा काल में वातावरण में आर्द्रता बढ़ जाने से पसीना जल्दी नहीं सूखता।
मरुस्थल की हवा में अत्यधिक शुष्कता होती है, जबकि तटीय क्षेत्रों में उच्च आर्द्रता पाई जाती है।
Praval ↔ शैवाल
समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र में कठोर प्रवाल और सूक्ष्म शैवाल का परस्पर सहजीवन अद्वितीय है।
तालाब की सतह पर हरी शैवाल फैलने से धूप नीचे नहीं पहुंच पाती।
Shuddhata ↔ प्रदूषण
हिमालयी वातावरण की शुद्धता में सांस लेने से असाध्य रोग भी शांत होने लगते हैं।
औद्योगिक कारखानों का धुआं वायु में प्रदूषण बढ़ाता है, जिसे वृक्षारोपण से शुद्धता में बदला जा सकता है।
Gart ↔ शिखर
महासागरों के तल में हजारों मीटर गहरे गर्त पाए जाते हैं, जहां सूर्य का प्रकाश कभी नहीं पहुंचता।
एक ओर आकाश छूता हिम शिखर है तो दूसरी ओर गहरी गर्त का अंधकार है।
Loo ↔ शीत लहर
दोपहर में चलने वाली गर्म लू शरीर का जल सोख लेती है, इसलिए छाछ और पानी पीते रहना चाहिए।
जनवरी में शीत लहर से लोग कांप उठते हैं, जबकि मई-जून में लू से बचने के लिए घरों में बंद रहते हैं।
Jungle ↔ शहर
जंगल में वन्यजीव स्वतंत्र विचरण करते हैं, जबकि शहर में कंक्रीट की ऊंची इमारतें होती हैं।
प्रदूषण मुक्त जीवन जीने के लिए लोग कभी-कभी शहर का शोर छोड़कर जंगल की शांति की शरण लेते हैं।
Shasya-Shyaamla ↔ मरुस्थली
नहरों के पानी से राजस्थान की बंजर धरती भी शस्य-श्यामला उपजाऊ भूमि में बदल गई।
मरुस्थली में केवल रेतीले टीले और कंटीली झाड़ियां दृष्टिगोचर होती हैं।
Krodh ↔ शांति
अत्यधिक क्रोध मनुष्य के विवेक और निर्णय लेने की क्षमता को नष्ट कर देता है।
विवाद के समय मानसिक शांति बनाए रखना ही सच्ची समझदारी है।
Shanti ↔ अशांति
ध्यान और आत्मचिंतन से मन को गहन शांति की अनुभूति होती है।
आपसी अविश्वास के कारण पूरे समाज में अशांति फैल गई थी।
Aanand ↔ शोक
सत्संग और संगीत के वातावरण में आत्मा को असीम आनंद मिलता है।
अप्रिय समाचार सुनकर पूरा नगर गहरे शोक में डूब गया।
Santap ↔ शीतलता
प्रियजन के वियोग का संताप हृदय को अंदर ही अंदर जलाता रहता है।
संतों के वचनों से तप्त मन को शीतलता और धैर्य प्राप्त होता है।
Udweg ↔ शांतभाव
क्रोध और उद्वेग के क्षणों में लिया गया निर्णय प्रायः गलत साबित होता है।
योगी पुरुष हर परिस्थिति में शांतभाव धारण किए रहते हैं।
Shraddha ↔ अश्रद्धा
गुरुजनों के प्रति सच्ची श्रद्धा ही ज्ञान प्राप्ति का प्रथम द्वार है।
ज्ञान के प्रति अश्रद्धा रखने वाला व्यक्ति कभी शिक्षित नहीं हो सकता।
Aashish ↔ शाप
बड़ों का पावन आशीष जीवन की हर राह को आसान बना देता है।
पौराणिक कथाओं में क्रोधी ऋषियों के शाप से राजाओं का पतन वर्णित है।
Shubh ↔ अशुभ
गृह प्रवेश का यह मुहूर्त अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
अशुभ संकेत देखकर यात्रा को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया।
Shoor ↔ भीरु
शूर सैनिक युद्धभूमि में अंतिम सांस तक वीरता से लड़े।
भीरु स्वभाव का व्यक्ति संघर्ष से सदा दूर भागता है।
Aanandit ↔ शोकाकुल
विवाह के शुभ अवसर पर सारा परिवार आनंदित था।
प्रियजन के अचानक निधन से सभी परिजन शोकाकुल हो उठे।
Shantachitta ↔ उद्विग्न
शांतचित्त होकर कार्य करने से सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
भविष्य की अनिश्चितता से मन उद्विग्न और व्याकुल रहने लगा।
Harshollas ↔ शोक
त्योहार के आगमन पर चारों दिशाओं में हर्षोल्लास छा गया।
अचानक आई विपत्ति ने पूरे उत्सव को शोक में बदल दिया।