Sundar ↔ कुरूप
बाहरी रूप से सुंदर दिखने वाले व्यक्ति के विचार भी सुंदर हों, यह आवश्यक नहीं; कभी-कभी कुरूप काया में भी सुंदर आत्मा वास करती है।
मन में यदि ईर्ष्या और द्वेष हो तो सुंदर चेहरा भी कुरूप और अप्रिय लगने लगता है।
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Sundar ↔ कुरूप
बाहरी रूप से सुंदर दिखने वाले व्यक्ति के विचार भी सुंदर हों, यह आवश्यक नहीं; कभी-कभी कुरूप काया में भी सुंदर आत्मा वास करती है।
मन में यदि ईर्ष्या और द्वेष हो तो सुंदर चेहरा भी कुरूप और अप्रिय लगने लगता है।
Saral ↔ कठिन
गणित के इस सरल सवाल को उलझाकर जटिल मत बनाओ।
निरंतर अभ्यास से कठिन से कठिन विषय भी अत्यंत सरल प्रतीत होने लगते हैं।
Geela ↔ सूखा
धूप में गीले कपड़े तेजी से सूखकर सूखे हो जाते हैं।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
Saaf ↔ गंदा
हमें अपने परिवेश को गंदा नहीं रहने देना चाहिए बल्कि हमेशा साफ़-सुथरा रखना चाहिए।
गंदा जल और वातावरण बीमारियों को न्योता देते हैं, इसलिए साफ-सफाई जीवन का आधार है।
Chauda ↔ संकरा
राजमार्ग बहुत चौड़ा था, किंतु गाँव में प्रवेश करते ही रास्ता संकरा हो गया।
पहाड़ी रास्तों का संकरा मार्ग चालकों के संयम की परीक्षा लेता है जहां चौड़ी सड़कें दुर्लभ हैं।
Seedha ↔ टेढ़ा
सीधा रास्ता हमेशा टेढ़े और घुमावदार रास्तों की तुलना में कम समय लेता है।
टेढ़ा वृक्ष भी कठिन हवाओं को सह लेता है, जबकि सीधा पेड़ तूफान में उखड़ जाता है।
Samarth ↔ असमर्थ
समर्थ लोगों को समाज के असमर्थ और दुर्बल वर्ग की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।
असमर्थ होने पर भी जो दूसरों की भलाई की भावना रखता है, उसका संकल्प कभी व्यर्थ नहीं जाता।
Shuddh ↔ अशुद्ध
शुद्ध जल स्वास्थ्यवर्धक होता है जबकि अशुद्ध पानी अनेक बीमारियों का कारण बनता है।
अशुद्ध विचारों को मन से बाहर निकालना ही साधना और आत्मशुद्धि का प्रथम चरण है।
Spasht ↔ अस्पष्ट
वक्ता के विचार बिल्कुल स्पष्ट थे, उनमें कोई अस्पष्ट संकेत नहीं था।
अस्पष्ट निर्देश भ्रम उत्पन्न करते हैं, इसलिए संवाद सदा स्पष्ट और पारदर्शी होना चाहिए।
Sambhav ↔ असंभव
दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम से असंभव कार्य भी संभव बन जाते हैं।
कठिन परिश्रम और अटूट आत्मविश्वास से असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी संभव हो जाते हैं।
Shreshth ↔ निम्न
सत्कर्म करने वाला व्यक्ति समाज में श्रेष्ठ पद पाता है जबकि दुर्जन निम्न माना जाता है।
निम्न सोच मनुष्य के व्यक्तित्व को संकीर्ण बना देती है, जबकि श्रेष्ठ विचार उसे ऊंचा उठाते हैं।
Sajeev ↔ निर्जीव
चित्रकार ने कैनवास पर ऐसा सजीव चित्र बनाया कि निर्जीव पत्थर भी बोलते नजर आए।
निर्जीव पत्थरों में भी मूर्तिकार अपनी छेनी से सजीव भाव उकेर देता है।
Shaant ↔ अशांत
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
अशांत मन कभी भी सत्य का निर्णय नहीं ले पाता, इसलिए ध्यान द्वारा शांति पाना आवश्यक है।
Chanchal ↔ स्थिर
ध्यान लगाने से चंचल मन भी धीरे-धीरे स्थिर और एकाग्र हो जाता है।
स्थिर जल में ही सूर्य का निर्मल प्रतिबिंब स्पष्ट दिखाई देता है, चंचल लहरों में नहीं।
Durbal ↔ सबल
न्यायपूर्ण समाज में सबल व्यक्ति कभी दुर्बल पर अत्याचार नहीं करता।
सबल का धर्म है कि वह दुर्बल की रक्षा करे, न कि उस पर अपना प्रभुत्व जमाए।
Shaktishaali ↔ शक्तिहीन
शक्तिशाली राष्ट्र का दायित्व है कि वह शक्तिहीन पड़ोसियों की संप्रभुता का आदर करे।
बिना नैतिक बल के मनुष्य बाह्य रूप से कितना भी संपन्न हो, आंतरिक रूप से शक्तिहीन रहता है।
Sookshma ↔ स्थूल
सूक्ष्म विचार ही कालांतर में स्थूल कर्मों और उपलब्धियों में रूपांतरित होते हैं।
मनुष्य की आंखें स्थूल पदार्थों को देख पाती हैं, किंतु अणु जैसे सूक्ष्म तत्वों को नहीं।
Saakaar ↔ निराकार
भक्त अपने आराध्य के साकार रूप की उपासना करते हैं, जबकि दार्शनिक निराकार ब्रह्म का चिंतन करते हैं।
भक्त साकार रूप में ईश्वर का ध्यान करते हैं, जबकि ज्ञानी निराकार ब्रह्म की अनुभूति करते हैं।
Saguna ↔ निर्गुण
सूरदास जी ने सगुण कृष्ण भक्ति का गान किया, वहीं कबीरदास जी ने निर्गुण राम की आराधना की।
निर्गुण संत कबीर ने परमात्मा को समस्त उपाधियों से परे एक रस माना है।
Kshanik ↔ शाश्वत
सांसारिक सुख क्षणिक होते हैं, जबकि सत्य और करुणा का आनंद शाश्वत होता है।
सत्य और धर्म का मूल्य शाश्वत है जो युगों के परिवर्तन के बाद भी कभी नहीं मिटता।
Sthaayi ↔ अस्थायी
सच्चे मित्र स्थायी संबल बनते हैं, जबकि झूठे साथी केवल अस्थायी लाभ के लिए जुड़ते हैं।
संसार के समस्त सुख-दुख अस्थायी हैं, इसलिए सुख में अहंकार और दुख में विलाप अनुचित है।
Durlabh ↔ सुलभ
सच्चा मार्गदर्शन अत्यंत दुर्लभ होता है, जबकि व्यर्थ सलाह हर चौराहे पर सुलभ मिल जाती है।
जो ज्ञान सुलभ है उसकी उपेक्षा न करें, क्योंकि वह दुर्लभ अवसर का निर्माण करता है।
Dushkar ↔ सुकर
सत्य के मार्ग पर चलना दुष्कर हो सकता है, किंतु आत्मसंतोष के लिए यही सुकर मार्ग है।
अनुभवी मार्गदर्शक के सान्निध्य में अत्यंत दुष्कर कार्य भी सुकर और सरल बन जाता है।
Saghan ↔ विरल
तराई के सघन वनों की तुलना में पर्वतीय शिखरों पर वनस्पति विरल पाई जाती है।
पहाड़ों की अत्यधिक ऊंचाई पर विरल वायु के कारण सांस लेना कठिन हो जाता है।
Shwet ↔ श्याम
श्वेत हंस और श्याम वर्ण का कौवा दोनों के रंग में गहरा अंतर होता है।
वर्षा ऋतु में आकाश में घिरते श्याम मेघ किसानों के हृदय में हर्ष का संचार करते हैं।
Susheel ↔ दुःशील
सुशील कन्या परिवार का गौरव बढ़ाती है जबकि दुःशील संतान बदनामी लाती है।
दुःशील संगति से अच्छे संस्कार भी नष्ट हो जाते हैं, इसलिए सुशील मित्रों की संगति करें।
Sajjan ↔ दुर्जन
सज्जन पुरुष सदा परोपकार में रत रहते हैं जबकि दुर्जन दूसरों को हानि पहुँचाने में।
दुर्जन की मीठी बातों से भी सावधान रहना चाहिए क्योंकि उसके मन में कपट छिपा रहता है।
Sadhu ↔ असाधु
साधु पुरुषों का सानिध्य पापों को हरता है जबकि असाधु संगति पतन की ओर ले जाती है।
असाधु प्रवृत्ति के लोग दूसरों के पतन में ही अपना हित तलाशते हैं।
Shisht ↔ अशिष्ट
शिष्ट आचरण सभ्य समाज की पहचान है, अशिष्ट बातें किसी को शोभा नहीं देतीं।
अशिष्ट व्यवहार किसी भी सुसंस्कृत सभा में स्वीकार्य नहीं होता, शिष्टाचार ही सम्मान दिलाता है।
Sabhya ↔ असभ्य
सभ्य राष्ट्र विवादों का हल शांतिपूर्ण संवाद से निकालते हैं, असभ्य युद्ध से नहीं।
असभ्य वाणी बोलने से अपनी ही हीनता प्रकट होती है, इसलिए मधुर और सभ्य बोलें।
Swatantra ↔ परतंत्र
स्वतंत्र देश का नागरिक सिर उठाकर जीता है, जबकि परतंत्र समाज दासता की बेड़ियों में जकड़ा रहता है।
परतंत्र व्यक्ति स्वर्ण के पिंजरे में भी स्वतंत्रता के खुले आकाश के लिए तड़पता रहता है।
Subodh ↔ दुर्बोध
शिक्षक ने सुबोध भाषा में गणित समझाया, जिससे दुर्बोध सूत्र भी आसानी से समझ आ गए।
कठिन भाषा का दुर्बोध ग्रंथ गुरु की सरल व्याख्या से सुबोध और सुगम बन जाता है।
Vistrit ↔ संक्षिप्त
परीक्षा में विस्तृत उत्तर के स्थान पर संक्षिप्त और सारगर्भित बिंदु लिखना बेहतर होता है।
संक्षिप्त उत्तर में भी यदि मुख्य तथ्य समाहित हों तो वह विस्तृत निबंध से अधिक प्रभावी होता है।
Sankeern ↔ विस्तीर्ण
संकीर्ण मानसिकता वाले लोग हमेशा अपने दायरे में सिमटे रहते हैं जबकि विस्तीर्ण दृष्टि विश्व को अपना मानती है।
महासागर का विस्तीर्ण जलविस्तार क्षितिज के पार तक फैला दृष्टिगोचर होता है।
Vyaapak ↔ सीमित
इस नीति का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ा, इसका असर केवल सीमित क्षेत्र तक नहीं रहा।
सीमित साधनों के बावजूद दृढ संकल्प से मनुष्य असीम उपलब्धियां अर्जित कर सकता है।
Aseem ↔ ससीम
ईश्वर की अनुकंपा असीम होती है, जिसकी तुलना ससीम मानवीय क्षमताओं से नहीं की जा सकती।
मनुष्य की बुद्धि ससीम है, जबकि यह ब्रह्मांड असीम और अनंत रहस्यों से परिपूर्ण है।
Anant ↔ सांत
नीला आकाश अनंत प्रतीत होता है, जबकि धरती की सीमाएं सांत और निश्चित हैं।
भौतिक संसार का विस्तार सांत है, जबकि चेतना का परमात्मा रूप अनंत है।
Sakriya ↔ निष्क्रिय
स्वास्थ्य के लिए सक्रिय जीवनशैली आवश्यक है, निष्क्रिय पड़े रहने से बीमारियां घेर लेती हैं।
निष्क्रिय रहकर केवल भाग्य के भरोसे बैठने से जीवन में कोई उपलब्धि हासिल नहीं होती।
Swabhavik ↔ अस्वाभाविक
दुख में आंसू बहना स्वाभाविक प्रतिक्रिया है, कठोर होकर भावहीन बने रहना अस्वाभाविक है।
अस्वाभाविक व्यवहार से बनावटीपन झलकता है, सहजता ही व्यक्ति को गरिमा प्रदान करती है।
Samriddh ↔ विपन्न
समृद्ध किसान खुशहाली से जीवन बिताता है जबकि विपन्न मजदूर दो वक्त की रोटी को तरसता है।
विपन्न वर्ग के उत्थान के बिना किसी भी राष्ट्र की संपूर्ण समृद्धि संभव नहीं है।
Sampanna ↔ विपन्न
साधनों से संपन्न होने पर भी मनुष्य यदि विनम्र न हो तो उसका वैभव व्यर्थ है।
विपन्न वर्ग के उत्थान के बिना किसी भी राष्ट्र की संपूर्ण समृद्धि संभव नहीं है।
Sukhee ↔ दुखी
संतोषी व्यक्ति सदा सुखी रहता है जबकि लोभी मनुष्य हमेशा दुखी ही रहता है।
दुखी जनों के कष्ट का निवारण करना ही मानव जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य और पुण्य है।
Satya ↔ असत्य
सत्य वचन भले ही कड़वे लगें, पर असत्य मीठा होकर भी पतन कराता है।
असत्य का सहारा लेने वाले को एक झूठ छिपाने के लिए सौ नए झूठ बोलने पड़ते हैं।
Mithya ↔ सत्य
मिथ्या प्रपंच में उलझने के बजाय यथार्थ सत्य को समझना ही बुद्धिमानी है।
सत्य की राह कठिन अवश्य होती है, किंतु अंततः विजय सत्य की ही होती है।
Saras ↔ नीरस
कवि का काव्य अत्यंत सरस था, कोई भी श्रोता उसे नीरस नहीं कह सका।
नीरस व्याख्यान श्रोताओं को ऊब से भर देता है, उसमें रोचक उदाहरण होने चाहिए।
Sushikshit ↔ अशिक्षित
सुशिक्षित समाज में कुप्रथाओं का कोई स्थान नहीं होता, अशिक्षित लोग ही अंधविश्वास में फंसते हैं।
अशिक्षित समाज को विद्या का प्रकाश देकर ही राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति संभव है।
Shikshit ↔ अशिक्षित
एक शिक्षित नागरिक अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति भी सचेत रहता है।
अशिक्षित समाज को विद्या का प्रकाश देकर ही राष्ट्र की सर्वांगीण प्रगति संभव है।
Shraant ↔ अश्रांत
दिनभर के परिश्रम से श्रांत मजदूर रात्रि में गहरी नींद सोता है।
अश्रांत परिश्रमी व्यक्ति बिना थके अपने निर्धारित लक्ष्य की दिशा में अग्रसर रहता है।
Jaagrat ↔ सुषुप्त
जाग्रत राष्ट्र ही अपनी सीमाओं और अधिकारों की रक्षा कर सकता है, सुषुप्त समाज पिछड़ जाता है।
सुषुप्त प्रतिभा को उचित प्रोत्साहन मिलने पर वह अद्भुत चमत्कार कर दिखाती है।
Sheelvaan ↔ चरित्रहीन
शीलवान व्यक्ति विपत्ति में भी मर्यादा नहीं छोड़ता।
चरित्रहीन व्यक्ति धन और सत्ता पाकर भी कभी आत्मिक शांति प्राप्त नहीं कर पाता।