Tez ↔ धीमा
कछुआ धीमा चलकर भी जीत गया जबकि तेज़ दौड़ने वाला खरगोश सोता रह गया।
धीमा किंतु निरंतर प्रयास खरगोश की तेज़ चाल वाले को भी पीछे छोड़ देता है।
अक्षर 'त' से प्रारंभ होने वाले कुल 106 विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 1–50):
Tez ↔ धीमा
कछुआ धीमा चलकर भी जीत गया जबकि तेज़ दौड़ने वाला खरगोश सोता रह गया।
धीमा किंतु निरंतर प्रयास खरगोश की तेज़ चाल वाले को भी पीछे छोड़ देता है।
Teevra ↔ मंद
तीव्र आंधी में विशाल वृक्ष उखड़ गए जबकि मंद समीर में तृण मुस्कुराते रहे।
मंद पवन की शीतल थपकी थके हुए पथिक को शांत विश्राम देती है।
Thos ↔ तरल
तापमान बढ़ने पर ठोस बर्फ पिघलकर तरल जल का रूप ले लेती है।
तापमान बढ़ने पर कठोर बर्फ पिघलकर तरल जल के रूप में बहने लगती है।
Teekshna ↔ कुंद
तीक्ष्ण बुद्धि वाला बालक शीघ्र सीखता है जबकि कुंद मस्तिष्क वाले को अधिक समय लगता है।
कुंद चाकू से फल काटना दुष्कर होता है, उसे तीक्ष्ण धार की आवश्यकता होती है।
Tripta ↔ अतृप्त
स्वादिष्ट भोजन से पेट तृप्त हो गया किंतु ज्ञान की पिपासा सदा अतृप्त ही रहती है।
वासनाओं की अग्नि में जितना घी डाला जाए, वह उतनी ही अतृप्त रहकर भड़कती है।
Sammaan ↔ तिरस्कार
गुरुजनों को यथोचित सम्मान देना चाहिए, किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए।
सत्कर्म का पुरस्कार मिलता है जबकि दुराचार का तिरस्कार ही फल होता है।
Tiraskaar ↔ पुरस्कार
सत्कर्म का पुरस्कार मिलता है जबकि दुराचार का तिरस्कार ही फल होता है।
उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छात्र को पुरस्कार मिला जबकि अनुशासनहीनता पर दंड दिया गया।
Swaagat ↔ तिरस्कार
अतिथि का द्वार पर आत्मीय स्वागत किया गया।
सत्कर्म का पुरस्कार मिलता है जबकि दुराचार का तिरस्कार ही फल होता है।
Bhokta ↔ त्यागी
मनुष्य अपने कर्मों का स्वयं ही कर्ता और भोक्ता होता है।
त्यागी पुरुष संसार के भोगों में लिप्त न होकर लोककल्याण में जीवन समर्पित करता है।
Lokatntra ↔ तानाशाही
लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को मतदान करने और अपने विचार व्यक्त करने का मूल अधिकार होता है।
तानाशाही में शासन की संपूर्ण शक्ति एक व्यक्ति के हाथों में केंद्रित हो जाती है और जनता के अधिकार छिन जाते हैं।
Sahabhaagitaa ↔ तटस्थता
स्वच्छ भारत अभियान की वास्तविक सफलता जन-सहभागिता पर ही पूरी तरह निर्भर करती है।
समाज की समस्याओं के प्रति जागरूक न होकर तटस्थता बरतना नागरिक दायित्वों की उपेक्षा है।
Pakshapaata ↔ तटस्थता
न्यायाधीश को किसी भी पक्षपात से ऊपर उठकर केवल साक्ष्यों के आधार पर फैसला देना चाहिए।
पंचायती न्याय में निष्पक्षता और तटस्थता की नीति अपनाने से दोनों पक्षों का विश्वास बना रहता है।
Shikhar ↔ तलहटी
पर्वतारोही तलहटी से कठिन चढ़ाई आरंभ कर अंततः बर्फ से ढके शिखर पर ध्वज फहराते हैं।
पर्वत की तलहटी में घने वन और नदियां बहती हैं, जबकि शिखर निर्जन और हिमच्छादित रहता है।
Tapt ↔ शीतल
तप्त बालू पर नंगे पैर चलना कठिन होता है, जबकि शीतल जलधारा में चलना अत्यंत सुखद है।
पर्वतों से बहती शीतल बयार थके हुए यात्रियों की उष्ण थकान को पलभर में हर लेती है।
Aalok ↔ तिमिर
महापुरुषों के विचार समाज से अज्ञान रूपी तिमिर को हटाकर आलोक का प्रसार करते हैं।
एक नन्हा सा दीप भी गहन तिमिर को चीरकर आलोक की किरण बिखेरने में सक्षम होता है।
Jyoti ↔ तम
उपनिषद् का अमर संदेश है: तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात् अंधकार से प्रकाश की ओर चलो।
सद्गुरु का सान्निध्य मन के अज्ञानांधकार तम को मिटाकर ज्ञान की पावन ज्योति जगाता है।
Toofan ↔ शांति
समुद्र में उठे भीषण तूफान के शांत होने पर ही चारों ओर सुखद शांति का वातावरण बना।
भीषण तूफान के थम जाने के बाद फैली गहरी शांति प्रकृति के नवजीवन का संकेत देती है।
Tarang ↔ निस्तब्धता
सरोवर में पत्ता गिरने से तरंग उठती है, जबकि बिना हलचल के उसमें निस्तब्धता छाई रहती है।
गहरे वन में रात के समय छाई निस्तब्धता को केवल दूर बहती नदी की कलकल ध्वनि तोड़ती है।
Him ↔ ताप
सूर्य के प्रचंड ताप से हिमालय का पिघलता हिम पावन सदानीरा नदियों को जन्म देता है।
सूर्य का प्रचंड ताप पर्वतों के जमे हिम को पिघलाकर सदानीरा नदियों में बदल देता है।
Saagar ↔ तट
उफनता सागर दूर तक जलमग्न दिखाई देता है और उसकी लहरें आकर शांत तट से टकराती हैं।
नाविक ने यात्रियों को सुरक्षित तट पर उतार दिया और पुनः उफनती मझधार में उतर गया।
Tat ↔ मझधार
नाविक ने यात्रियों को सुरक्षित तट पर उतार दिया और पुनः उफनती मझधार में उतर गया।
सच्चा मित्र वह है जो मझधार में नाव फंसने पर भी साथ न छोड़े और किनारे तक पहुंचाए।
Tateeya ↔ अंतर्देशीय
तटीय राज्यों में समकारी समुद्री जलवायु रहती है, जबकि अंतर्देशीय भागों में तापमान विषम होता है।
अंतर्देशीय क्षेत्रों में सर्दियों में भारी ठंड और गर्मियों में भीषण लू का सामना करना पड़ता है।
Bayaar ↔ तूफान
प्रातःकाल बहने वाली ठंडी बयार शरीर में स्फूर्ति भरती है, जबकि आंधी भय पैदा करती है।
समुद्र में उठे भीषण तूफान के शांत होने पर ही चारों ओर सुखद शांति का वातावरण बना।
Taraai ↔ पहाड़
तराई के दलदली और नम क्षेत्र में घने जंगल उगते हैं, जो ऊंचे पहाड़ की शुष्कता से भिन्न हैं।
तराई के नम जंगलों से गुजरकर ही यात्री ऊंचे पहाड़ की बर्फीली चोटियों तक पहुंचते हैं।
Bhaabar ↔ तराई
भाबर के कंकरीले पत्थरों में नदियां विलुप्त हो जाती हैं और तराई के मैदान में पुनः प्रकट होती हैं।
तराई के दलदली और नम क्षेत्र में घने जंगल उगते हैं, जो ऊंचे पहाड़ की शुष्कता से भिन्न हैं।
Trishna ↔ तृप्ति
धन की अंधी तृष्णा कभी शांत नहीं होती, वह बढ़ती ही जाती है।
सरल भोजन और शुद्ध विचारों से जीवन में सच्ची तृप्ति मिलती है।
Lobh ↔ त्याग
लोभ पाप का मूल है जो मनुष्य को अनैतिक मार्ग पर ले जाता है।
राष्ट्र सेवा के लिए अपना सर्वस्व त्याग करने वाले महापुरुष सदैव अमर रहते हैं।
Rosh ↔ तुष्टि
अन्याय देखकर जनता के मन में भीषण रोष भड़क उठा।
न्यायसंगत निर्णय से दोनों पक्षों को पूर्ण तुष्टि प्राप्त हुई।
Tarun ↔ वृद्ध
तरुण अवस्था में शरीर में असीम ऊर्जा और नई उमंग का संचार रहता है।
वृद्ध अवस्था में शरीर की त्वचा झुर्रियों से भर जाती है और चाल धीमी हो जाती है।
Hathelee ↔ तलवा
ठंड के मौसम में दोनों हाथों की हथेली आपस में रगड़ने से शरीर में गर्माहट आती है।
नंगे पैर घास पर टहलने से पैर का तलवा प्राकृतिक रूप से ऊर्जावान और संवेदनशील बना रहता है।
Tap ↔ भोग
ऋषि-मुनियों ने कठोर तप के बल पर आत्मज्ञान और परम शांति प्राप्त की।
क्षणभंगुर भोग विलास में लीन रहने से मनुष्य की आध्यात्मिक ऊर्जा क्षीण हो जाती है।
Tyaag ↔ ग्रहण
मातृभूमि की रक्षा के लिए सैनिकों का सर्वोच्च त्याग सदैव वंदनीय रहेगा।
केवल भौतिक सुखों का ग्रहण करना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं होना चाहिए।
Titiksha ↔ असहनशीलता
सुख-दुख और शीत-उष्ण के द्वंद्वों को बिना शिकायत सहना ही तितिक्षा कहलाता है।
असहनशीलता के कारण छोटी-सी असुविधा भी व्यक्ति को विचलित कर देती है।
Vandneeya ↔ तिरस्करणीय
देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर सैनिक समस्त देशवासियों के लिए वंदनीय हैं।
राष्ट्रद्रोह और गद्दारी में लिप्त व्यक्ति का आचरण सदा तिरस्करणीय होता है।
Saatvik ↔ तामसिक
सात्विक भोजन और शांत विचार मनुष्य के मन को निर्मल और तनावमुक्त रखते हैं।
तामसिक भोजन और आलस्य से शरीर में जड़ता और प्रमाद की वृद्धि होती है।
Tyaagi ↔ भोगी
त्यागी महापुरुषों ने समाज को नई दिशा देने के लिए अपने संपूर्ण सुखों का उत्सर्ग कर दिया।
भोगी मनुष्य क्षणिक विलासिता के पीछे दौड़ते-दौड़ते जीवन का अमूल्य समय नष्ट कर देता है।
Trinabhakshi ↔ मांसभक्षी
जंगल में तृणभक्षी हिरणों का बड़ा झुंड हरी घास चर रहा था।
मांसभक्षी बाघ अपनी भूख मिटाने के लिए शिकार की ताक में छिपा रहता है।
Taaza ↔ बासी
प्रातःकाल खेत से तोड़ी गई ताज़ा सब्जियाँ स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं।
बासी भोजन खाने से पेट में संक्रमण और विषाक्तता हो सकती है।
Teekha ↔ फीका
लाल मिर्च के कारण सब्जी का स्वाद बहुत तीखा और चटपटा हो गया था।
रोगी के लिए चिकित्सक ने फीका और बिना मिर्च-मसाले का दलिया खाने की सलाह दी।
Bhookh ↔ तृप्ति
दिनभर पैदल चलने के बाद शाम को तीव्र भूख लग आई थी।
मनपसंद थाली भर भोजन करने के बाद चेहरे पर तृप्ति का भाव दिखाई दिया।
Pyaas ↔ तृप्ति
धूप में दौड़ने के बाद कंठ सूख गया और असहनीय प्यास लगने लगी।
मटके का शीतल जल पीते ही तन-मन को अपार तृप्ति मिल गई।
Sada ↔ ताज़ा
टोकरी में रखे एक सड़े टमाटर ने बाकी सब्जियों को भी दूषित कर दिया।
बगीचे से लाई गई ताज़ा ककड़ी खाने में कुरकुरी और रसीली थी।
Ubla ↔ तला
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग उबला हुआ चना और मूंग नाश्ते में लेते हैं।
कड़ाही में अधिक तला हुआ भोजन वजन बढ़ाने और गैस का कारण बनता है।
Meethaapan ↔ तीखापन
गाजर के हलवे में मावे और चीनी का मीठापन बहुत संतुलित था।
हरी मिर्च के तीखापन से उसकी आँखों से पानी निकलने लगा।
Kshudha ↔ तृप्ति
कठोर श्रम के बाद क्षुधा शांत करने के लिए उसने गरम रोटियाँ खाईं।
संतुष्ट होकर थाली हटाने पर चेहरे पर पूर्ण तृप्ति के भाव झलक रहे थे।
Pipaasa ↔ तृप्ति
रेगिस्तान की तपती रेत में मुसाफिर की पिपासा बढ़ती ही जा रही थी।
शीतल जल का घूंट भरते ही उसकी पिपासा शांत हो गई और तृप्ति मिली।
Tikta ↔ मधुर
चिरायता और गिलोय का स्वाद तिक्त होता है जो बुखार उतारता है।
मुनक्का और अंजीर का स्वाद मधुर तथा बलवर्धक होता है।
Tadka ↔ सादा
लहसुन और हींग के तड़के से कढ़ी का स्वाद चौगुना हो गया।
पेट खराब होने पर बिना तड़के की सादा खिचड़ी ही खानी चाहिए।
Taazgi ↔ बासीपन
पुदीने और धनिए की ताज़गी चटनी के स्वाद को नया निखार देती है।
फ्रिज से बाहर रखे केक में दो दिन बाद बासीपन और दुर्गंध आने लगी।
Tapaaya ↔ ठंडाया
चाशनी बनाने के लिए चीनी के घोल को धीमी आंच पर तपाया गया।
मटके में रखकर शरबत को पीने से पहले खूब ठंडाया गया।