Achha ↔ बुरा
जीवन में अच्छा और बुरा समय दोनों आते हैं, किंतु धैर्यवान व्यक्ति कभी विचलित नहीं होता।
बुरा संग मनुष्य की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है, जबकि अच्छा संग जीवन को संवारता है।
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Achha ↔ बुरा
जीवन में अच्छा और बुरा समय दोनों आते हैं, किंतु धैर्यवान व्यक्ति कभी विचलित नहीं होता।
बुरा संग मनुष्य की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है, जबकि अच्छा संग जीवन को संवारता है।
Bada ↔ छोटा
सच्चा बड़प्पन धन में बड़ा होने से नहीं, बल्कि छोटे लोगों का आदर करने से सिद्ध होता है।
संसार में कोई काम छोटा नहीं होता, हर ईमानदार प्रयास का बड़ा महत्व होता है।
Bhaari ↔ हल्का
कठिन परिस्थितियों का भारी बोझ भी सकारात्मक सोच से हल्का लगने लगता है।
सच्चाई स्वीकार कर लेने से हृदय का भारी अपराधबोध हल्का और शांत हो जाता है।
Balwaan ↔ निर्बल
सच्चा बलवान वही है जो निर्बल को सहारा देकर अपने बल का सदुपयोग करे।
निर्बल को सताने वाला कभी वास्तविक शांति और ईश्वर की कृपा प्राप्त नहीं कर सकता।
Buddhimaan ↔ बुद्धिहीन
बुद्धिमान व्यक्ति संकट में समाधान खोजता है जबकि बुद्धिहीन घबराकर हाथ खड़े कर देता है।
बुद्धिहीन आचरण अपने ही हाथों अपनी हानि कराने का मार्ग प्रशस्त करता है।
Sureela ↔ बेसुरा
गायक का सुरीला कंठ सभा को मंत्रमुग्ध कर गया।
बेसुरा गायन कानों को खटकता है, जबकि सुरीली तान मन को आनंदित कर देती है।
Baadhyakaari ↔ गैर-बाध्यकारी
अदालत का यह फैसला सभी पक्षों के लिए बाध्यकारी है।
गैर-बाध्यकारी संधियों के उल्लंघन पर कोई कानूनी दंड नहीं होता, वे केवल नैतिक हैं।
Bahugya ↔ अल्पज्ञ
बहुज्ञ विद्वान हर विषय पर सारगर्भित विचार व्यक्त कर सकते हैं।
अल्पज्ञ व्यक्ति थोड़ा सा जानकर ही स्वयं को सर्वज्ञाता मानकर अहंकार करने लगता है।
Bandhan ↔ मुक्ति
अज्ञानता मनुष्य को बंधनों में जकड़ती है, ज्ञान उसे मुक्ति का मार्ग दिखाता है।
कुरीतियों और अंधविश्वासों से मुक्ति पाकर ही समाज प्रगति कर सकता है।
Bhaai ↔ बहन
रक्षाबंधन पर भाई बहन की रक्षा का संकल्प दोहराता है।
भाई-बहन का रिश्ता निस्वार्थ स्नेह और अटूट विश्वास का प्रतीक है।
Bhokta ↔ त्यागी
मनुष्य अपने कर्मों का स्वयं ही कर्ता और भोक्ता होता है।
त्यागी पुरुष संसार के भोगों में लिप्त न होकर लोककल्याण में जीवन समर्पित करता है।
Svaichchhika ↔ बाध्यकारी
रक्तदान शिविर में युवाओं ने स्वैच्छिक रूप से आगे आकर बड़ी संख्या में रक्तदान किया।
यातायात के नियमों का पालन करना हर नागरिक के लिए बाध्यकारी होता है, न कि ऐच्छिक।
Satyanishthaa ↔ भ्रष्टाचार
अधिकारी ने पूरी सत्यनिष्ठा के साथ सरकारी धन का सदुपयोग करते हुए निर्माण कार्य पूरा कराया।
भ्रष्टाचार के कारण समाज में योग्य व्यक्तियों का हक मारा जाता है और व्यवस्था कमजोर होती है।
Bhedabhaava ↔ सद्भाव
विद्यालय में सभी छात्रों के साथ बिना किसी भेदभाव के समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सद्भाव बनाए रखने के लिए शांति समिति की बैठक आयोजित हुई।
Bahishkaara ↔ समावेशन
स्वाधीनता आंदोलन के समय विदेशी वस्तुओं का पूर्ण बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया गया।
दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में लाने के लिए नीतिगत समावेशन और विशेष सुविधाएं आवश्यक हैं।
Bhojana ↔ उपवास
दोपहर के समय परिवार के सभी सदस्यों ने एक साथ बैठकर प्रेमपूर्वक भोजन किया।
शारीरिक शुद्धि और संयम के उद्देश्य से उन्होंने सप्ताह में एक दिन उपवास रखने का नियम बनाया।
Bhoomi ↔ गगन
भूमि की उर्वरा शक्ति और गगन से प्राप्त धूप मिलकर फसलों को लहलहाते हैं।
विशाल गगन और शस्य-श्यामला धरा के मध्य प्रकृति की अनुपम शोभा दृष्टिगोचर होती है।
Jwaar ↔ भाटा
चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से समुद्र में ज्वार और भाटा की चक्रीय प्रक्रिया घटित होती है।
भाटा के समय समुद्र का जलस्तर पीछे हट जाता है, जबकि ज्वार के समय लहरें तट को लांघती हैं।
Bhor ↔ सांझ
किसान भोर होते ही खेतों पर चल पड़ते हैं और सांझ ढलने पर ही घर वापस लौटते हैं।
सांझ के झुटपुटे में चरवाहे अपनी गायों को चराकर गांव की ओर हांक लाते हैं।
Baadh ↔ सूखा
नदियों में बाढ़ आने से गांव डूब जाते हैं, जबकि सूखे में पीने के पानी की किल्लत हो जाती है।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
Upjaaoo ↔ बंजर
उपजाऊ मिट्टी देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है, जिसे बंजर होने से बचाना हमारा कर्तव्य है।
सिंचाई की समुचित व्यवस्था होने पर बंजर जमीन भी उपजाऊ खेत में तब्दील हो जाती है।
Bhaanu ↔ शशि
भानु की प्रखर किरणें संपूर्ण जगत को प्रकाशवान करती हैं, जबकि शशि की किरणें सुखद शीतलता देती हैं।
नीले आकाश में पूर्णिमा का शशि भानु के अस्त होने के उपरांत मनमोहक रूप धर लेता है।
Barf ↔ आग
बर्फ जैसी ठंडक को दूर करने के लिए अलाव की आग ही सहारा बनती है।
शीत की कड़कड़ाती बर्फ में अलाव की आग ही जीवनदायिनी गर्माहट प्रदान करती है।
Bramhand ↔ अणु
प्राचीन ऋषियों के अनुसार जो कुछ विशाल ब्रह्मांड में है, वह सूक्ष्मतम अणु में भी समाया है।
विज्ञान सिद्ध करता है कि एक छोटे से अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति होती है।
Aranya ↔ बस्ती
तपस्वी जन शांत अरण्य में साधना करते हैं और कोलाहलपूर्ण मानव बस्ती से दूर रहते हैं।
नदी किनारे बसी बस्ती में रौनक रहती है, जबकि नदी के पार बीहड़ अरण्य फैला है।
Dhaara ↔ भंवर
कुशल नाविक शांत धारा में नाव दौड़ाते हैं और खतरनाक भंवर से नौका को बचाते हैं।
भंवर में फंसी नाव को किनारे की ओर मोड़ना नाविक के धैर्य और पराक्रम की परीक्षा है।
Saavan ↔ भादों
लोकगीतों में सावन के झूले और भादों की घनघोर झड़ी का बड़ा मार्मिक वर्णन मिलता है।
सावन की फुहारों के पश्चात भादों की घनघोर झड़ी नदियों को लबालब भर देती है।
Bhoogarbha ↔ अंतरिक्ष
खनिज संपदा भूगर्भ में छिपी है, जबकि सौर ऊर्जा का अक्षय स्रोत अंतरिक्ष से प्राप्त होता है।
मानव ने एक ओर गहरे भूगर्भ का अध्ययन किया है तो दूसरी ओर अनंत अंतरिक्ष की थाह ली है।
Baadal ↔ खुला आसमान
काले बादल हटते ही नीला खुला आसमान चमक उठा और चारों तरफ रोशनी फैल गई।
खगोलीय अवलोकन के लिए खुला आसमान अनिवार्य शर्त है, क्योंकि बादलों में तारे नहीं दिखते।
Bayaar ↔ तूफान
प्रातःकाल बहने वाली ठंडी बयार शरीर में स्फूर्ति भरती है, जबकि आंधी भय पैदा करती है।
समुद्र में उठे भीषण तूफान के शांत होने पर ही चारों ओर सुखद शांति का वातावरण बना।
Bhaabar ↔ तराई
भाबर के कंकरीले पत्थरों में नदियां विलुप्त हो जाती हैं और तराई के मैदान में पुनः प्रकट होती हैं।
तराई के दलदली और नम क्षेत्र में घने जंगल उगते हैं, जो ऊंचे पहाड़ की शुष्कता से भिन्न हैं।
Bhooskhalan ↔ स्थिर भूमि
भारी बारिश के कारण पहाड़ों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है, जहां स्थिर भूमि भी दरकने लगती है।
भूस्खलन के खतरे वाले ढलानों पर बस्तियां बसाने के बजाय स्थिर भूमि पर निर्माण सुरक्षित है।
Bhay ↔ साहस
मन में यदि अज्ञात का भय हो तो व्यक्ति आगे बढ़ने से हिचकिचाता है।
सच्चा साहस वही है जो विपत्ति के सामने निडर खड़ा रहे।
Bhram ↔ यथार्थ
मृगतृष्णा के समान सांसारिक सुख केवल एक सुंदर भ्रम मात्र हैं।
कल्पना के आकाश से उतरकर यथार्थ की ठोस भूमि पर कार्य करना चाहिए।
Sahanubhuti ↔ बेरुखी
विपदा के समय व्यक्त की गई सच्ची सहानुभूति पीड़ित को संबल देती है।
जरूरतमंदों के प्रति ऐसी बेरुखी दिखाना मानवीय मूल्यों के विपरीत है।
Apnapan ↔ बेगानापन
गाँव के लोगों के व्यवहार में जो अपनापन दिखता है, वह दुर्लभ है।
महानगरों की भीड़ में कभी-कभी मनुष्य बेगानापन महसूस करता है।
Bhakti ↔ विरक्ति
ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति हृदय को समस्त चिंताओं से मुक्त कर देती है।
धार्मिक आडंबरों को देखकर बुद्धिजीवियों में उनसे विरक्ति हो गई।
Nirbhay ↔ भयभीत
सत्य के मार्ग पर चलने वाला मनुष्य सदैव निर्भय रहता है।
शेर की दहाड़ सुनकर जंगल के सभी छोटे जीव भयभीत हो गए।
Shoor ↔ भीरु
शूर सैनिक युद्धभूमि में अंतिम सांस तक वीरता से लड़े।
भीरु स्वभाव का व्यक्ति संघर्ष से सदा दूर भागता है।
Befikr ↔ फिक्रमंद
बाल्यावस्था में बच्चे भविष्य से बेफिक्र होकर खेलते हैं।
संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए माता-पिता सदैव फिक्रमंद रहते हैं।
Bhavuk ↔ कठोरहृदय
दीन-दुखियों की कथा सुनकर भावुक मनुष्य के आँसू निकल आते हैं।
कठोरहृदय व्यक्ति दूसरों के क्रंदन से भी अप्रभावित रहता है।
Abhay ↔ भय
ईश्वर की शरण में जाने पर साधक को अभय का वरदान मिलता है।
शत्रु के भय से कांपते हुए सैनिक पीछे हटने लगे।
Badhir ↔ श्रवणक्षम
बधिर छात्र संकेत भाषा की सहायता से संवाद स्थापित करने में निपुण था।
श्रवणक्षम व्यक्तियों को भी शोर-शराबे वाले वातावरण में कानों की रक्षा करनी चाहिए।
Sudaul ↔ बेडौल
नियमित दंड-बैठक लगाने से युवक का शरीर सुडौल और आकर्षक बन गया।
दिनभर बैठे रहने और अस्वास्थ्यकर भोजन से शरीर बेडौल होकर भारी हो जाता है।
Baahari ↔ भीतरी
त्वचा शरीर की बाहरी सुरक्षा परत है जो धूल और संक्रमण से बचाती है।
भीतरी अंगों की कार्यप्रणाली को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित रक्तचाप आवश्यक है।
Daayaan ↔ बायाँ
लेखन और प्रमुख कार्यों के लिए अधिकांश लोग दायाँ हाथ प्राथमिकता से प्रयोग करते हैं।
कुछ लोग जन्मजात रूप से बायाँ हाथ अधिक कुशलता और गति से उपयोग करने में दक्ष होते हैं।
Imaandaari ↔ बेईमानी
कर्मचारी की ईमानदारी और लगन को देखकर प्रबंधक ने उसे पदोन्नति प्रदान की।
बेईमानी से अर्जित किया गया धन व्यक्ति को समाज में कभी वास्तविक आदर नहीं दिला सकता।
Imaandaar ↔ बेईमान
ईमानदार अफसर ने रिश्वत के करोड़ों रुपयों के प्रलोभन को एक झटके में ठुकरा दिया।
बेईमान ठेकेदार ने घटिया सामग्री का प्रयोग कर पुल का निर्माण संकट में डाल दिया।
Tap ↔ भोग
ऋषि-मुनियों ने कठोर तप के बल पर आत्मज्ञान और परम शांति प्राप्त की।
क्षणभंगुर भोग विलास में लीन रहने से मनुष्य की आध्यात्मिक ऊर्जा क्षीण हो जाती है।
Moksh ↔ बंधन
भारतीय दर्शन में जीवन का अंतिम परम पुरुषार्थ मोक्ष की प्राप्ति माना गया है।
माया और तृष्णा के बंधन में जकड़ा मनुष्य कभी आंतरिक शांति का अनुभव नहीं कर पाता।