Tez ↔ धीमा
कछुआ धीमा चलकर भी जीत गया जबकि तेज़ दौड़ने वाला खरगोश सोता रह गया।
धीमा किंतु निरंतर प्रयास खरगोश की तेज़ चाल वाले को भी पीछे छोड़ देता है।
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Tez ↔ धीमा
कछुआ धीमा चलकर भी जीत गया जबकि तेज़ दौड़ने वाला खरगोश सोता रह गया।
धीमा किंतु निरंतर प्रयास खरगोश की तेज़ चाल वाले को भी पीछे छोड़ देता है।
Dhani ↔ निर्धन
धनी व्यक्ति यदि कृपण हो तो समाज में उसका सम्मान निर्धन ज्ञानी से कम ही होता है।
सच्चा दानी वह है जो निर्धन और असहाय लोगों की पीड़ा समझकर सहायता के लिए आगे आए।
Drishya ↔ अदृश्य
नेत्रों से दृश्य जगत का सौंदर्य देखा जा सकता है, किंतु ईश्वर की शक्ति अदृश्य रहती है।
वायु यद्यपि अदृश्य है, किंतु इसका स्पंदन और जीवनदायिनी शक्ति हर श्वास में प्रत्यक्ष है।
Durbal ↔ सबल
न्यायपूर्ण समाज में सबल व्यक्ति कभी दुर्बल पर अत्याचार नहीं करता।
सबल का धर्म है कि वह दुर्बल की रक्षा करे, न कि उस पर अपना प्रभुत्व जमाए।
Deergh ↔ ह्रस्व
व्याकरण में स्वरों का उच्चारण दीर्घ अथवा ह्रस्व अवधि में किया जाता है।
व्याकरण में ह्रस्व और दीर्घ स्वरों का सही उच्चारण अर्थ को स्पष्ट करता है।
Durlabh ↔ सुलभ
सच्चा मार्गदर्शन अत्यंत दुर्लभ होता है, जबकि व्यर्थ सलाह हर चौराहे पर सुलभ मिल जाती है।
जो ज्ञान सुलभ है उसकी उपेक्षा न करें, क्योंकि वह दुर्लभ अवसर का निर्माण करता है।
Dushkar ↔ सुकर
सत्य के मार्ग पर चलना दुष्कर हो सकता है, किंतु आत्मसंतोष के लिए यही सुकर मार्ग है।
अनुभवी मार्गदर्शक के सान्निध्य में अत्यंत दुष्कर कार्य भी सुकर और सरल बन जाता है।
Chamkila ↔ धुंधला
धूल जम जाने से चमकीला कांच भी धुंधला और मैला दिखाई देने लगता है।
कुहासे में धुंधला दिखने वाला मार्ग सूर्योदय के साथ स्पष्ट और आलोकित हो उठा।
Ujjwal ↔ धूमिल
कड़ी मेहनत से छात्र का भविष्य उज्ज्वल बनता है, जबकि कुसंगति उसे धूमिल कर देती है।
समय के थपेड़े ऐतिहासिक स्मारकों की चमक को धूमिल कर देते हैं जिसे संरक्षण की आवश्यकता होती है।
Susheel ↔ दुःशील
सुशील कन्या परिवार का गौरव बढ़ाती है जबकि दुःशील संतान बदनामी लाती है।
दुःशील संगति से अच्छे संस्कार भी नष्ट हो जाते हैं, इसलिए सुशील मित्रों की संगति करें।
Sajjan ↔ दुर्जन
सज्जन पुरुष सदा परोपकार में रत रहते हैं जबकि दुर्जन दूसरों को हानि पहुँचाने में।
दुर्जन की मीठी बातों से भी सावधान रहना चाहिए क्योंकि उसके मन में कपट छिपा रहता है।
Kripan ↔ दानी
कृपण व्यक्ति धन संचय करके भी भूखा मरता है, जबकि दानी पुरुष दान देकर अमर हो जाता है।
सच्चा दानी अपने दिए गए दान का कभी ढिंढोरा नहीं पीटता, वह गुप्त भाव से उपकार करता है।
Dayalu ↔ निर्दयी
दयालु राजा अपनी प्रजा पर कृपा करता है जबकि निर्दयी शासक केवल अत्याचार ढहाता है।
निर्दयी शिकारी बेजुबान पशुओं पर अत्याचार करते समय किंचित भी संकोच नहीं करता।
Kroor ↔ दयावान
क्रूर शिकारी ने मूक पशु पर बाण चलाया, किंतु दयावान साधु ने उसकी जान बचाई।
दयावान मनुष्य पीड़ित प्राणियों के आंसू पोंछकर स्वयं को धन्य अनुभव करता है।
Subodh ↔ दुर्बोध
शिक्षक ने सुबोध भाषा में गणित समझाया, जिससे दुर्बोध सूत्र भी आसानी से समझ आ गए।
कठिन भाषा का दुर्बोध ग्रंथ गुरु की सरल व्याख्या से सुबोध और सुगम बन जाता है।
Sukhee ↔ दुखी
संतोषी व्यक्ति सदा सुखी रहता है जबकि लोभी मनुष्य हमेशा दुखी ही रहता है।
दुखी जनों के कष्ट का निवारण करना ही मानव जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य और पुण्य है।
Daksha ↔ अदक्ष
दक्ष शल्य-चिकित्सक जटिल ऑपरेशन सरलता से कर देता है, नए व अदक्ष को सावधानी रखनी होती है।
अदक्ष कारीगर को समुचित प्रशिक्षण देकर निपुण बनाया जा सकता है।
Drishyamaan ↔ अदृश्यमान
क्षितिज पर दृश्यमान पर्वत घने बादलों के आते ही अदृश्यमान हो गया।
सूक्ष्मदर्शी के बिना अदृश्यमान जीवाणु भी जल में उपस्थित रहकर रोग फैला सकते हैं।
Deerghaayu ↔ अल्पायु
बुजुर्गों का आशीर्वाद होता है — दीर्घायु भव और यशस्वी बनो।
अल्पायु में ही स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों से संपूर्ण विश्व को आलोकित कर दिया।
Dhaarmik ↔ अधार्मिक
धार्मिक व्यक्ति सदा नीति-सम्मत राह चुनता है जबकि अधार्मिक अनीति की ओर आकर्षित होता है।
अधार्मिक आचरण समाज की नींव को खोखला कर कलह और अशांति को जन्म देता है।
Sugam ↔ दुर्गम
पुल बनने से नदी पार करना सुगम हो गया, अन्यथा पहले यह अत्यंत दुर्गम था।
पहाड़ी मार्ग पहले दुर्गम हुआ करते थे, किंतु नई सड़कों ने यात्रा को सुगम बना दिया है।
Supraapya ↔ दुष्प्राप्य
आजकल इंटरनेट के माध्यम से ज्ञान सुप्राप्य हो गया है।
घने जंगलों में पाई जाने वाली संजीवनी बूटी अत्यंत दुष्प्राप्य मानी जाती है।
Sukrit ↔ दुष्कृत
सुकृत कर्म करने से आत्मा को शांति मिलती है, दुष्कृत सदा पश्चाताप देता है।
दुष्कृत करने वाला भले ही कानून से बच जाए, अंतरात्मा के दंड से नहीं बच सकता।
Sugandhit ↔ दुर्गंधयुक्त
गुलाब का सुगंधित इत्र मन को मोह लेता है।
दुर्गंधयुक्त नाले संक्रामक रोगों का केंद्र बन जाते हैं जिन्हें ढकना आवश्यक है।
Saubhaagyashaali ↔ दुर्भाग्यशाली
वे सौभाग्यशाली हैं जिन्हें गुरु का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
दुर्भाग्यशाली मनुष्य भी यदि सतत परिश्रम करे तो अपने भाग्य की रेखाएं बदल सकता है।
Prabal ↔ दुर्बल
सच्चाई का पक्ष हमेशा प्रबल होता है, असत्य कितना भी दुर्बल क्यों न हो टिक नहीं सकता।
न्यायपूर्ण समाज में सबल व्यक्ति कभी दुर्बल पर अत्याचार नहीं करता।
Din ↔ रात
परिश्रमी व्यक्ति दिन और रात की परवाह किए बिना अपने लक्ष्य की प्राप्ति में जुटा रहता है।
कठिन परिश्रम के बाद रात की नींद अत्यंत सुखद और शांतिपूर्ण होती है।
Puraskaar ↔ दंड
उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छात्र को पुरस्कार मिला जबकि अनुशासनहीनता पर दंड दिया गया।
न्यायालय ने दोषी को कठोर दंड दिया।
Daata ↔ याचक
ईश्वर सबका परम दाता है, हम सब उसके सम्मुख याचक हैं।
दरवाजे पर आए याचक को खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए।
Desh ↔ विदेश
देश और विदेश दोनों में भारतीय संस्कृति की साख ऊंची है।
विदेश यात्रा से ज्ञान और दृष्टिकोण का विस्तार होता है।
Daasata ↔ मुक्ति
दासता से मुक्ति पाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग ने संघर्ष किया।
कुरीतियों और अंधविश्वासों से मुक्ति पाकर ही समाज प्रगति कर सकता है।
Shaharee ↔ देहाती
शहरी जीवन में तकनीकी सुविधाएं प्रचुर मात्रा में हैं परंतु प्रदूषण और भागदौड़ भी अधिक है।
देहाती परिवेश में खुली हवा, हरियाली और परस्पर मेलजोल की आत्मीयता देखने को मिलती है।
Dndaneeya ↔ क्षम्य
पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर कचरा जलाना कानून के तहत एक दंडनीय अपराध है।
अनजाने में हुई छोटी-मोटी मानवीय भूल सदैव क्षम्य मानी जाती है।
Deshabhakta ↔ देशद्रोही
सीमा पर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाला सैनिक सच्चा देशभक्त होता है।
देश की गोपनीय सुरक्षा जानकारियां शत्रुओं को बेचने वाला व्यक्ति अक्षम्य देशद्रोही है।
Dhoop ↔ छांव
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
जीवन धूप और छांव की भांति सुख और दुख का अनवरत संगम है।
Chhaya ↔ धूप
पेड़ स्वयं कड़ी धूप सहकर दूसरों को सुखद छाया प्रदान करते हैं।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Dhara ↔ गगन
वर्षा की बूंदें गगन से गिरकर प्यासी धरा को तृप्त और हरा-भरा कर देती हैं।
विशाल गगन और शस्य-श्यामला धरा के मध्य प्रकृति की अनुपम शोभा दृष्टिगोचर होती है।
Vyom ↔ धरा
वैज्ञानिकों ने धरा से रॉकेट प्रक्षेपित कर अनंत व्योम के रहस्यों को उजागर किया।
वर्षा की बूंदें गगन से गिरकर प्यासी धरा को तृप्त और हरा-भरा कर देती हैं।
Uttar ↔ दक्षिण
ध्रुवतारा सदा उत्तर दिशा में चमकता है, जिसके विपरीत दक्षिण दिशा स्थित होती है।
हिमालय भारत के उत्तर में और हिंद महासागर दक्षिण दिशा में स्थित है।
Dinkar ↔ निशाकर
दिनकर के उदय होते ही निशाकर की चांदनी आकाश में विलीन हो जाती है।
आकाश में निशाकर अपनी शीतल रश्मियों से धरती को शांत करता है जब दिनकर अस्त होता है।
Megh ↔ धूप
आसमान में काले मेघ छाते ही तेज धूप छिप गई और मौसम सुहाना हो गया।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Ghata ↔ धूप
सावन की घनी घटा घिरने से दिन में ही अंधेरा छा गया और धूप का नामोनिशान न रहा।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Paala ↔ धूप
शीत लहर में पाला पड़ने से सब्जियों की फसल नष्ट हो जाती है, जिसे धूप ही बचा सकती है।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Dhundh ↔ स्पष्टता
सर्दियों की सुबह छाई घनी धुंध धूप खिलने पर अद्भुत स्पष्टता में बदल गई।
सर्दियों की सुबह छाई धुंध छंटते ही वातावरण में अद्भुत स्पष्टता फैल गई।
Dhaara ↔ भंवर
कुशल नाविक शांत धारा में नाव दौड़ाते हैं और खतरनाक भंवर से नौका को बचाते हैं।
भंवर में फंसी नाव को किनारे की ओर मोड़ना नाविक के धैर्य और पराक्रम की परीक्षा है।
Daldal ↔ ठोस भूमि
दलदल में पैर पड़ते ही व्यक्ति धंसने लगता है, इसलिए ठोस भूमि पर ही मार्ग बनाना सुरक्षित है।
दलदल के भ्रामक धंसाव से बचकर ठोस भूमि पर कदम रखना ही सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करता है।
Oos ↔ धूप
हरी घास पर चमकती ओस की बूंदें सुबह की धूप खिलते ही भाप बनकर उड़ जाती हैं।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Kohra ↔ धूप
सर्दियों की सुबह घना कोहरा छाने से यातायात धीमा हो गया, जो दोपहर की धूप में सामान्य हुआ।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Dhoop-Chhaun ↔ एकरस मौसम
पहाड़ों का धूप-छांव भरा मौसम पल-पल में बदलता रहता है और पर्यटकों को चमत्कृत करता है।
पहाड़ों की बदलती धूप-छांव के विपरीत तटीय इलाकों में एकरस मौसम का अनुभव होता है।
Khushi ↔ दुख
सफलता मिलने पर पूरे परिवार में खुशी और उल्लास का माहौल बन गया।
संकट के समय धैर्य बनाए रखने से दुख और निराशा का प्रभाव कम हो जाता है।