Saghan ↔ विरल
तराई के सघन वनों की तुलना में पर्वतीय शिखरों पर वनस्पति विरल पाई जाती है।
पहाड़ों की अत्यधिक ऊंचाई पर विरल वायु के कारण सांस लेना कठिन हो जाता है।
Showing entries 1–50 of 199 Hindi antonym entries transliterated starting with 'V'.
Saghan ↔ विरल
तराई के सघन वनों की तुलना में पर्वतीय शिखरों पर वनस्पति विरल पाई जाती है।
पहाड़ों की अत्यधिक ऊंचाई पर विरल वायु के कारण सांस लेना कठिन हो जाता है।
Vineet ↔ उद्धत
विनीत छात्र गुरुओं के प्रिय होते हैं, वहीं उद्धत स्वभाव वाले अपनी प्रतिष्ठा खो बैठते हैं।
अहंकार से भरा उद्धत व्यक्ति ज्ञानियों की संगति से भी कोई लाभ नहीं उठा पाता।
Vistrit ↔ संक्षिप्त
परीक्षा में विस्तृत उत्तर के स्थान पर संक्षिप्त और सारगर्भित बिंदु लिखना बेहतर होता है।
संक्षिप्त उत्तर में भी यदि मुख्य तथ्य समाहित हों तो वह विस्तृत निबंध से अधिक प्रभावी होता है।
Sankeern ↔ विस्तीर्ण
संकीर्ण मानसिकता वाले लोग हमेशा अपने दायरे में सिमटे रहते हैं जबकि विस्तीर्ण दृष्टि विश्व को अपना मानती है।
महासागर का विस्तीर्ण जलविस्तार क्षितिज के पार तक फैला दृष्टिगोचर होता है।
Vyaapak ↔ सीमित
इस नीति का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ा, इसका असर केवल सीमित क्षेत्र तक नहीं रहा।
सीमित साधनों के बावजूद दृढ संकल्प से मनुष्य असीम उपलब्धियां अर्जित कर सकता है।
Samriddh ↔ विपन्न
समृद्ध किसान खुशहाली से जीवन बिताता है जबकि विपन्न मजदूर दो वक्त की रोटी को तरसता है।
विपन्न वर्ग के उत्थान के बिना किसी भी राष्ट्र की संपूर्ण समृद्धि संभव नहीं है।
Sampanna ↔ विपन्न
साधनों से संपन्न होने पर भी मनुष्य यदि विनम्र न हो तो उसका वैभव व्यर्थ है।
विपन्न वर्ग के उत्थान के बिना किसी भी राष्ट्र की संपूर्ण समृद्धि संभव नहीं है।
Vidvaan ↔ मूर्ख
विद्वान की संगति विवेक जगाती है जबकि मूर्ख की संगति संकट पैदा करती है।
मूर्ख व्यक्ति को हितकारी उपदेश देना भी व्यर्थ जाता है, जैसे बंजर भूमि में बीज बोना।
Kaalpanik ↔ वास्तविक
उपन्यास की कहानी काल्पनिक होती है, किंतु उसके पात्र वास्तविक जीवन से प्रेरित लगते हैं।
समस्या का वास्तविक कारण जाने बिना उसका स्थायी समाधान खोजना असंभव है।
Vaastavik ↔ अवास्तविक
वास्तविक स्थिति जाने बिना किसी पर दोषारोपण करना उचित नहीं।
अवास्तविक अपेक्षाएं पालने से अंत में केवल निराशा और पश्चाताप ही हाथ लगता है।
Mook ↔ वाचाल
मूक होई वाचाल पंगु चढ़इ गिरिबर गहन — ईश्वर कृपा से गूंगा भी वाचाल हो जाता है।
वाचाल व्यक्ति बिना विचारे बोलकर अक्सर अपनी ही गरिमा घटा लेता है।
Mitbhaashi ↔ वाचाल
मितभाषी नेता के हर शब्द का वजन होता है, वाचाल व्यक्ति की बात कोई गंभीरता से नहीं लेता।
वाचाल व्यक्ति बिना विचारे बोलकर अक्सर अपनी ही गरिमा घटा लेता है।
Anuraagi ↔ विरागी
संसार का अनुरागी मनुष्य मोह में बंधता है, विरागी संन्यासी मोक्ष की ओर बढ़ता है।
विरागी साधु सांसारिक प्रलोभनों से मुक्त होकर आत्मतत्व के अनुसंधान में लीन रहता है।
Vishesh ↔ सामान्य
प्रत्येक बालक में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है, कोई भी सामान्य नहीं होता।
सामान्य नागरिक की देशभक्ति ही किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति और संबल होती है।
Vyakti-gat ↔ सार्वजनिक
सार्वजनिक हित के सामने व्यक्तिगत स्वार्थ का त्याग करना ही सच्ची देशभक्ति है।
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक देशवासी का पावन नागरिक कर्तव्य है।
Riju ↔ वक्र
गणित में ऋजु रेखा दो बिंदुओं के बीच सबसे छोटा मार्ग होती है, जबकि वक्र रेखा टेढ़ी होती है।
वक्र मार्ग चलने में समय और परिश्रम अधिक लेता है, सरल सीधा मार्ग श्रेयस्कर है।
Anivaarya ↔ वैकल्पिक
परीक्षा में प्रथम खंड अनिवार्य है जबकि द्वितीय खंड में वैकल्पिक प्रश्न हैं।
वैकल्पिक ऊर्जा के स्रोतों को अपनाना पर्यावरण संरक्षण के लिए अनिवार्य हो चुका है।
Nirmaan ↔ विनाश
राष्ट्र के निर्माण में वर्षों लग जाते हैं, जबकि विनाश कुछ ही पलों में हो सकता है।
युद्ध केवल विनाश और संहार लाता है, शांति में ही लोक-कल्याण का निर्माण संभव है।
Vijay ↔ पराजय
सत्यमेव जयते — अंततः सत्य की ही विजय होती है।
साहसी खिलाड़ी पराजय से निराश होने के बजाय अपनी कमियों से सीख लेता है।
Milan ↔ विरह
दीर्घ विरह के पश्चात पुराने मित्रों का मिलन अत्यंत भावुक कर देने वाला था।
काव्य में विरह की वेदना मिलन के सुख को और अधिक गहरा बना देती है।
Sanyog ↔ वियोग
श्रृंगार रस के दो पक्ष होते हैं — संयोग और वियोग।
प्रियजनों का वियोग हृदय को भारी पीड़ा पहुंचाता है।
Kraya ↔ विक्रय
व्यापार में क्रय और विक्रय के अंतर से ही लाभ निर्धारित होता है।
बाजार में अच्छी गुणवत्ता की वस्तुओं का विक्रय तेजी से होता है।
Aay ↔ व्यय
बुद्धिमान गृहस्थ अपनी आय के अनुसार ही व्यय करता है ताकि भविष्य सुरक्षित रहे।
अनावश्यक व्यय से बचकर बचत करना वित्तीय स्थिरता की नींव है।
Desh ↔ विदेश
देश और विदेश दोनों में भारतीय संस्कृति की साख ऊंची है।
विदेश यात्रा से ज्ञान और दृष्टिकोण का विस्तार होता है।
Videsh ↔ स्वदेश
विदेश यात्रा से ज्ञान और दृष्टिकोण का विस्तार होता है।
स्वदेश की मिट्टी की खुशबू परदेश में रहने वाले प्रवासी को सदा अपनी ओर खींचती है।
Sangathan ↔ विघटन
मजबूत संगठन से कठिन लक्ष्य भी पा लिए जाते हैं, आंतरिक कलह से विघटन तय है।
राष्ट्रविरोधी ताकतें देश के विघटन का षड्यंत्र रचती हैं, जिसे सजग नागरिक विफल कर देते हैं।
Vaidh ↔ अवैध
व्यापार केवल वैध साधनों से करना चाहिए, अवैध धन कभी सुख नहीं देता।
प्रशासन ने अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर सरकारी भूमि को मुक्त कराया।
Vidhi ↔ निषेध
शास्त्रों में शुभ कार्यों के लिए विधि और पापकर्मों के लिए निषेध बताया गया है।
अस्पतालों में धूम्रपान पूर्णतः निषेध है।
Var ↔ वधू
विवाह समारोह में वर और वधू दोनों ने अग्नि को साक्षी मानकर फेरे लिए।
ससुराल में नई वधू का पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत हुआ।
Adhyaapak ↔ विद्यार्थी
एक समर्पित अध्यापक समाज के भविष्य का सच्चा निर्माता होता है।
विद्यार्थी जीवन कठिन तपस्या का काल होता है जिसमें चरित्र का निर्माण होता है।
Vakta ↔ श्रोता
कुशल वक्ता अपने विचारों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।
सभामंच पर ओजस्वी वक्ता और ध्यानमग्न श्रोता का सामंजस्य अद्भुत था।
Vidya ↔ अविद्या
विद्या अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाती है, अविद्या मनुष्य को भटकाती है।
अविद्या के आवरण को हटाए बिना आत्मज्ञान की प्राप्ति असंभव है।
Vyasthi ↔ समष्टि
व्यष्टि और समष्टि के बीच संतुलन ही स्वस्थ समाज की पहचान है।
समष्टि के कल्याण में ही व्यष्टि का हित समाहित रहता है।
Sattaaroodh ↔ विपक्षी
सत्तारूढ़ दल पर जनकल्याणकारी योजनाओं को निष्पक्ष रूप से धरातल पर उतारने की जवाबदेही होती है।
संसद में विपक्षी दल नीतियों की निष्पक्ष समीक्षा कर शासन की कमियों को उजागर करता है।
Snskriti ↔ विकृति
हमारे देश की प्राचीन संस्कृति विविधता में एकता और पारस्परिक सद्भाव का संदेश देती है।
नशाखोरी और अभद्रता समाज के ताने-बाने में पैदा होने वाली गंभीर विकृति के लक्षण हैं।
Saamudaayika ↔ व्यक्तिगत
गांव के विकास के लिए सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया जहाँ सभी एकत्र हो सकें।
सार्वजनिक निर्णय लेते समय व्यक्तिगत लाभ और स्वार्थ को पीछे रखना पड़ता है।
Samarasataa ↔ विषमता
समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने से ही राष्ट्र में वास्तविक समरसता स्थापित होती है।
आर्थिक और सामाजिक विषमता को दूर किए बिना एक सशक्त समाज का निर्माण संभव नहीं है।
Vibhaajana ↔ एकीकरण
स्वार्थपरक राजनीति समाज का विभाजन कर लोगों को परस्पर बांटने का प्रयास करती है।
सरदार पटेल ने सैकड़ों रियासतों का एकीकरण करके भारत को एक सूत्र में पिरोया।
Ghareloo ↔ व्यावसायिक
गृहणियां घरेलू कार्यों के साथ-साथ परिवार के प्रत्येक सदस्य के स्वास्थ्य का ध्यान रखती हैं।
आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन पर नगर निगम ने प्रतिबंध लगा दिया है।
Grihasthee ↔ वैराग्य
ईमानदारी से अपनी गृहस्थी संभालना और बाल-बच्चों का भरण-पोषण करना भी एक महान साधना है।
सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर उन्होंने वैराग्य धारण कर लिया और संन्यास मार्ग चुन लिया।
Vidhura ↔ सपत्नीक
पत्नी के देहांत के पश्चात वह वृद्ध व्यक्ति विधुर जीवन बिताते हुए एकांत में रहने लगा।
धार्मिक अनुष्ठान और यज्ञ में यजमान को सपत्नीक अर्थात पत्नी सहित बैठने का शास्त्रीय विधान है।
Vyavasthaa ↔ अव्यवस्था
मेले में पुलिस प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण की चाक-चौबंद व्यवस्था कर रखी थी।
बिना योजना के आयोजित कार्यक्रम में भगदड़ मचने से चारों ओर अव्यवस्था फैल गई।
Vaimanasya ↔ सौमनस्य
पुरानी रंजिश और वैमनस्य को भुलाकर दोनों परिवारों ने आपस में हाथ मिला लिए।
पड़ोसियों के बीच प्रेम और सौमनस्य का वातावरण रहने से जीवन सुखमय बन जाता है।
Vyom ↔ धरा
वैज्ञानिकों ने धरा से रॉकेट प्रक्षेपित कर अनंत व्योम के रहस्यों को उजागर किया।
वर्षा की बूंदें गगन से गिरकर प्यासी धरा को तृप्त और हरा-भरा कर देती हैं।
Vrishti ↔ अनावृष्टि
समय पर होने वाली वृष्टि भूमि को संवारती है, जबकि अनावृष्टि हरियाली को नष्ट कर देती है।
किसानों के लिए अनावृष्टि का संकट अतिवृष्टि से भी अधिक गंभीर सिद्ध होता है।
Vasant ↔ पतझड़
पतझड़ में पेड़ पत्ते गिरा देते हैं, किंतु वसंत आते ही वे नवपल्लवों से सुशोभित हो उठते हैं।
जीवन का नियम है कि पतझड़ के उदास दिनों के बाद वसंत की सुनहरी बहार अवश्य आती है।
Anu ↔ विराट
विज्ञान सिद्ध करता है कि एक छोटे से अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति होती है।
सूक्ष्म अणु के विखंडन से विराट ऊर्जा की उत्पत्ति प्रकृति का विस्मयकारी नियम है।
Van ↔ मरु
हरे-भरे सघन वन वर्षा को आकर्षित करते हैं, जबकि शुष्क मरु में जल की बूंदें तरसती हैं।
वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से मरु को भी हरे-भरे वन में बदला जा सकता है।
Varsha ↔ सूखा
वर्षा ऋतु में नदियां लबालब भर जाती हैं, जबकि सूखे में उनकी तलहटी की रेत दिखने लगती है।
प्रकृति के प्रकोप से बचना कठिन है; कभी सूखा धरती को सुखाता है तो कभी बाढ़ सब बहा ले जाती है।
Nirvaat ↔ वायु
प्रकाश की किरणें निर्वात में भी गमन कर सकती हैं, किंतु ध्वनि को संचरण हेतु वायु चाहिए।
अंतरिक्ष के शून्य निर्वात में जीवन संभव नहीं, धरती की सघन वायु ही श्वास देती है।