Sundar ↔ कुरूप
बाहरी रूप से सुंदर दिखने वाले व्यक्ति के विचार भी सुंदर हों, यह आवश्यक नहीं; कभी-कभी कुरूप काया में भी सुंदर आत्मा वास करती है।
मन में यदि ईर्ष्या और द्वेष हो तो सुंदर चेहरा भी कुरूप और अप्रिय लगने लगता है।
अक्षर 'क' से प्रारंभ होने वाले कुल 259 विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 1–50):
Sundar ↔ कुरूप
बाहरी रूप से सुंदर दिखने वाले व्यक्ति के विचार भी सुंदर हों, यह आवश्यक नहीं; कभी-कभी कुरूप काया में भी सुंदर आत्मा वास करती है।
मन में यदि ईर्ष्या और द्वेष हो तो सुंदर चेहरा भी कुरूप और अप्रिय लगने लगता है।
Saral ↔ कठिन
गणित के इस सरल सवाल को उलझाकर जटिल मत बनाओ।
निरंतर अभ्यास से कठिन से कठिन विषय भी अत्यंत सरल प्रतीत होने लगते हैं।
Komal ↔ कठोर
फूलों की पंखुड़ियाँ कोमल होती हैं जबकि पर्वत की चट्टानें अत्यंत कठोर।
राजा का कठोर दंड देखकर सभासद विस्मित रह गए, किंतु रानी का हृदय अत्यंत कोमल था।
Meetha ↔ कड़वा
मीठे बोल सभी का मन मोह लेते हैं जबकि कड़वे वचन दूसरों को चोट पहुँचाते हैं।
सच्चाई कड़वी औषधि के समान होती है, किंतु अंत में उसका फल मीठा ही निकलता है।
Madhur ↔ कटु
कोयल की मधुर वाणी सबको भाती है जबकि कौवे का कटु स्वर किसी को पसंद नहीं।
कटु वचन तीखे तीर की भांति हृदय को भेद देते हैं, जबकि मधुर वाणी घाव भर देती है।
Kshanik ↔ शाश्वत
सांसारिक सुख क्षणिक होते हैं, जबकि सत्य और करुणा का आनंद शाश्वत होता है।
सत्य और धर्म का मूल्य शाश्वत है जो युगों के परिवर्तन के बाद भी कभी नहीं मिटता।
Teekshna ↔ कुंद
तीक्ष्ण बुद्धि वाला बालक शीघ्र सीखता है जबकि कुंद मस्तिष्क वाले को अधिक समय लगता है।
कुंद चाकू से फल काटना दुष्कर होता है, उसे तीक्ष्ण धार की आवश्यकता होती है।
Kripan ↔ दानी
कृपण व्यक्ति धन संचय करके भी भूखा मरता है, जबकि दानी पुरुष दान देकर अमर हो जाता है।
सच्चा दानी अपने दिए गए दान का कभी ढिंढोरा नहीं पीटता, वह गुप्त भाव से उपकार करता है।
Kroor ↔ दयावान
क्रूर शिकारी ने मूक पशु पर बाण चलाया, किंतु दयावान साधु ने उसकी जान बचाई।
दयावान मनुष्य पीड़ित प्राणियों के आंसू पोंछकर स्वयं को धन्य अनुभव करता है।
Kathit ↔ अकथित
कथित शब्दों की अपेक्षा अकथित मौन कभी-कभी अधिक गहरा संदेश दे जाता है।
अनेक गहरे भाव अकथित रहकर भी आंखों की भाषा से स्वतः व्यक्त हो जाते हैं।
Praakritik ↔ कृत्रिम
प्राकृतिक आपदाओं से बचना मनुष्य के वश में नहीं, किंतु कृत्रिम प्रदूषण को रोका जा सकता है।
कृत्रिम सुगंध कुछ ही देर टिकती है, जबकि प्राकृतिक फूलों की महक वातावरण को महकाए रखती है।
Pakka ↔ कच्चा
पक्के मकान तेज आंधी का सामना कर लेते हैं जबकि कच्चे झोपड़े ढह जाते हैं।
कच्चा घड़ा पानी का भार नहीं सह पाता, भट्ठी में तपकर ही वह पक्का और उपयोगी बनता है।
Kushal ↔ अकुशल
कुशल कारीगर बारीक नक्काशी कर लेता है जबकि अकुशल मजदूर पत्थर भी ठीक से नहीं तराश पाता।
अकुशल हाथों में बहुमूल्य औजार भी नष्ट हो जाते हैं, कुशलता अभ्यास से ही आती है।
Yathaarth ↔ काल्पनिक
काल्पनिक सपनों में जीने के बजाय यथार्थ जीवन की चुनौतियों का सामना करो।
काल्पनिक दुनिया में विचरने के बजाय कठोर यथार्थ का सामना करना ही बुद्धिमानी है।
Kaalpanik ↔ वास्तविक
उपन्यास की कहानी काल्पनिक होती है, किंतु उसके पात्र वास्तविक जीवन से प्रेरित लगते हैं।
समस्या का वास्तविक कारण जाने बिना उसका स्थायी समाधान खोजना असंभव है।
Adhik ↔ कम
अधिक बोलना मूर्खता की निशानी है, कम और सार्थक बोलना बुद्धिमत्ता है।
कम साधनों में भी संतोषपूर्वक जीवन जीने वाला व्यक्ति सदा सुखी रहता है।
Kam ↔ ज्यादा
कम संसाधनों में भी संतुष्ट रहना ज्यादा पाने की लालसा से श्रेष्ठ है।
आवश्यकता से ज्यादा संग्रह करने की प्रवृत्ति समाज में असंतुलन पैदा करती है।
Mridu ↔ कठोर
मृदु वाणी शत्रु को भी मित्र बना लेती है, जबकि कठोर व्यवहार अपनों को भी दूर कर देता है।
राजा का कठोर दंड देखकर सभासद विस्मित रह गए, किंतु रानी का हृदय अत्यंत कोमल था।
Roopwaan ↔ कुरूप
रूपवान चेहरे से अधिक मूल्यवान सुंदर और पवित्र हृदय होता है।
मन में यदि ईर्ष्या और द्वेष हो तो सुंदर चेहरा भी कुरूप और अप्रिय लगने लगता है।
Karkash ↔ मधुर
कर्कश ध्वनि कानों को चुभती है जबकि मधुर संगीत मन को शांत करता है।
कोयल की मधुर वाणी सबको भाती है जबकि कौवे का कटु स्वर किसी को पसंद नहीं।
Kutil ↔ सरल
कुटिल राजनीतिज्ञ अपनी बातों में फंसाते हैं जबकि सरल व्यक्ति सच्चाई बोलता है।
गणित के इस सरल सवाल को उलझाकर जटिल मत बनाओ।
Parush ↔ कोमल
परुष वचन हृदय को छलनी कर देते हैं जबकि कोमल बोल मरहम का काम करते हैं।
फूलों की पंखुड़ियाँ कोमल होती हैं जबकि पर्वत की चट्टानें अत्यंत कठोर।
Sulakshan ↔ कुलक्षण
सुलक्षण बालक परिवार का मान बढ़ाता है।
बचपन के कुलक्षण यदि समय रहते न सुधारे जाएं तो आगे चलकर विनाशकारी बनते हैं।
Kanjoos ↔ उदार
कंजूस व्यक्ति आवश्यकता पड़ने पर भी खर्च नहीं करता।
उदार हृदय वाले लोग सर्वकल्याण सोचते हैं जबकि अनुदार व्यक्ति केवल अपने स्वार्थ तक सीमित रहते हैं।
Kritagya ↔ कृतघ्न
उपकार मानने वाला कृतज्ञ कहलाता है जबकि उपकार भूल जाने वाला कृतघ्न माना जाता है।
कृतघ्न व्यक्ति संकट में सहारा देने वाले उपकारी का भी उपकार भूल जाता है।
Keerti ↔ अपकीर्ति
दानवीर कर्ण की कीर्ति अमर है, दुर्योधन के कुकृत्यों ने उसे अपकीर्ति दी।
कुकर्मों से अर्जित अपकीर्ति कुल की पीढ़ियों तक बदनामी का कारण बन जाती है।
Kraya ↔ विक्रय
व्यापार में क्रय और विक्रय के अंतर से ही लाभ निर्धारित होता है।
बाजार में अच्छी गुणवत्ता की वस्तुओं का विक्रय तेजी से होता है।
Kartavya ↔ अकर्तव्य
संकट के समय देश की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है।
कर्तव्य और अकर्तव्य का भेद समझकर ही धर्मसम्मत जीवन जिया जा सकता है।
Adhikaar ↔ कर्तव्य
अधिकारों की मांग के साथ-साथ कर्तव्यों का निर्वहन भी समान रूप से जरूरी है।
संकट के समय देश की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है।
Karta ↔ कर्म
व्याकरण में क्रिया का प्रभाव कर्ता अथवा कर्म पर पड़ता है।
संसार में कर्ता का मान उसके द्वारा किए गए निष्काम कर्म से ही निर्धारित होता है।
Kureeti ↔ सुरीति
दहेज प्रथा जैसी अमानवीय कुरीति के विरुद्ध समाज के सभी प्रबुद्ध लोगों को आवाज उठानी चाहिए।
अतिथि सत्कार और बड़ों का आदर करना समाज की प्राचीन व कल्याणकारी सुरीति है।
Kuleena ↔ अकुलीन
प्राचीन काल में कुलीन परिवारों के आचार-विचार को समाज में आदर्श माना जाता था।
लोकतंत्र में व्यक्ति की योग्यता मायने रखती है, चाहे वह किसी भी अकुलीन परिवार से क्यों न हो।
Kasbaa ↔ महानगर
हमारा छोटा सा कस्बा चारों ओर खेतों से घिरा हुआ शांत और सुरक्षित इलाका है।
मुंबई और दिल्ली जैसे विशाल महानगर चौबीसों घंटे दौड़ते रहने वाले आर्थिक केंद्र हैं।
Dndaneeya ↔ क्षम्य
पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर कचरा जलाना कानून के तहत एक दंडनीय अपराध है।
अनजाने में हुई छोटी-मोटी मानवीय भूल सदैव क्षम्य मानी जाती है।
Kaaraavaasa ↔ मुक्ति
गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में दोषी पाए जाने पर उसे पांच वर्ष का कठोर कारावास हुआ।
सजा की अवधि पूरी होने के उपरांत बंदी को जेल से सम्मानपूर्वक मुक्ति मिल गई।
Suvyavasthaa ↔ कुव्यवस्था
स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत शहर की यातायात और जल सुव्यवस्था की सर्वत्र सराहना हुई।
अस्पताल में दवाओं की कमी और गंदगी प्रशासन की घोर कुव्यवस्था का जीता-जागता प्रमाण थी।
Sauhaarda ↔ कटुता
ईद और दीवाली पर एक-दूसरे के घर जाकर बधाई देने से समाज में आपसी सौहार्द प्रगाढ़ होता है।
अफवाहों और भड़काऊ भाषणों के कारण दोनों पक्षों के मध्य अविश्वास और कटुता उत्पन्न हो गई।
Shukla Paksha ↔ कृष्ण पक्ष
हिंदू पंचांग में चंद्रमा की कलाओं के आधार पर शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष निर्धारित होते हैं।
कृष्ण पक्ष में रातें क्रमशः अंधेरी होती जाती हैं, जबकि शुक्ल पक्ष में चांदनी बढ़ती है।
Naaisargik ↔ कृत्रिम
कश्मीर की घाटियों में नैसर्गिक सौंदर्य बिखरा पड़ा है, जिसकी तुलना किसी कृत्रिम रचना से नहीं हो सकती।
कृत्रिम सुगंध कुछ ही देर टिकती है, जबकि प्राकृतिक फूलों की महक वातावरण को महकाए रखती है।
Kallol ↔ शांति
पवन के झोंकों से सरिता में कल्लोल होने लगा, जिससे जल की पूर्व शांति भंग हो गई।
भीषण तूफान के थम जाने के बाद फैली गहरी शांति प्रकृति के नवजीवन का संकेत देती है।
Kshitij ↔ केंद्र
क्षितिज पर धरती और आकाश मिलते प्रतीत होते हैं, जबकि अंतरिक्ष का केंद्र अनंत में है।
क्षितिज की अनंत परिधि का संतुलन उसके स्थिर केंद्र पर ही टिका रहता है।
Kuhaasa ↔ स्वच्छ आकाश
पहाड़ी मार्ग पर कुहासा छाने से दृश्यता समाप्त हो गई, जो स्वच्छ आकाश होने पर ही लौटी।
पहाड़ी घाटियों में कुहासा हटने पर नीला स्वच्छ आकाश पर्यटकों का मन मोह लेता है।
Kohra ↔ धूप
सर्दियों की सुबह घना कोहरा छाने से यातायात धीमा हो गया, जो दोपहर की धूप में सामान्य हुआ।
कड़कड़ाती धूप के बाद घने वृक्ष की शीतल छांव पथिक को नवजीवन प्रदान करती है।
Kankad ↔ रेत
नदी की तलहटी में भारी कंकड़ नीचे बैठ जाते हैं, जबकि बारीक रेत पानी के साथ बहती है।
रेत पर महल बनाने के बजाय चट्टान जैसी मजबूत नींव पर मकान बनाना बुद्धिमानी है।
Krodh ↔ शांति
अत्यधिक क्रोध मनुष्य के विवेक और निर्णय लेने की क्षमता को नष्ट कर देता है।
विवाद के समय मानसिक शांति बनाए रखना ही सच्ची समझदारी है।
Karuna ↔ क्रूरता
महात्मा बुद्ध के हृदय में सभी प्राणियों के प्रति अगाध करुणा थी।
युद्ध में दिखाई गई क्रूरता मानवता के माथे पर कलंक बन जाती है।
Kshama ↔ दंड
क्षमा बलवानों का आभूषण है जो शत्रु को भी मित्र बना देती है।
न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर दंड सुनाया।
Kautuhal ↔ उदासीनता
वैज्ञानिक प्रयोगों के प्रति बच्चों का कौतूहल नई खोजों का बीज बोता है।
सामाजिक बुराइयों के प्रति उदासीनता बरतना नागरिकों को शोभा नहीं देता।
Kritagyata ↔ कृतघ्नता
उपकार करने वाले के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना श्रेष्ठ संस्कारों की निशानी है।
सहायता प्राप्त करके भी उपकार भूल जाना घोर कृतघ्नता है।
Anugrah ↔ कोप
प्रभु के विशेष अनुग्रह से ही यह महान संकट टल सका।
राजा के भयानक कोप से सारा दरबार कांप उठा।