Gahra ↔ उथला
नदी का यह भाग बहुत गहरा है, जबकि किनारों के समीप पानी उथला रहता है।
उथला पानी अधिक शोर करता है, जबकि गहरे जल की धारा शांत और गंभीर बहती है।
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Gahra ↔ उथला
नदी का यह भाग बहुत गहरा है, जबकि किनारों के समीप पानी उथला रहता है।
उथला पानी अधिक शोर करता है, जबकि गहरे जल की धारा शांत और गंभीर बहती है।
Uchit ↔ अनुचित
बुद्धिमान व्यक्ति उचित और अनुचित का भेद भली-भाँति समझते हैं।
अनुचित साधनों से प्राप्त सफलता क्षणिक होती है, उचित परिश्रम ही स्थायी यश दिलाता है।
Upasthit ↔ अनुपस्थित
समारोह में मुख्य अतिथि उपस्थित थे, किंतु कुछ प्रमुख वक्ता अनुपस्थित रहे।
कक्षा में अनुपस्थित रहने से छात्र महत्वपूर्ण पाठ के ज्ञान से वंचित रह जाता है।
Upayogi ↔ अनुपयोगी
समय का सदुपयोग जीवन को उपयोगी बनाता है जबकि आलस्य इसे अनुपयोगी कर देता है।
अनुपयोगी समझकर फेंकी गई वस्तुएं भी पुनर्चक्रण द्वारा मूल्यवान बन जाती हैं।
Uttam ↔ अधम
चंदन का वृक्ष उत्तम प्रकृति का प्रतीक है, सर्पों के लिपटने पर भी वह अधम नहीं बनता।
अधम कर्म करने वाला व्यक्ति समाज में घृणा का पात्र बनता है और आत्मसम्मान खो बैठता है।
Utkrisht ↔ निकृष्ट
कलाकार ने उत्कृष्ट कृति का सृजन किया, जिसे देखकर निकृष्ट नकलची भी दंग रह गए।
निकृष्ट आचरण किसी भी उच्च कुल के व्यक्ति को भी कलंकित कर देता है।
Ujjwal ↔ धूमिल
कड़ी मेहनत से छात्र का भविष्य उज्ज्वल बनता है, जबकि कुसंगति उसे धूमिल कर देती है।
समय के थपेड़े ऐतिहासिक स्मारकों की चमक को धूमिल कर देते हैं जिसे संरक्षण की आवश्यकता होती है।
Namra ↔ उद्दंड
नम्र स्वभाव के व्यक्ति की सब प्रशंसा करते हैं जबकि उद्दंड व्यवहार सभी को अखरता है।
उद्दंड आचरण छात्र की प्रतिष्ठा को धूमिल करता है, जबकि नम्र स्वभाव उसे सबका प्रिय बनाता है।
Vineet ↔ उद्धत
विनीत छात्र गुरुओं के प्रिय होते हैं, वहीं उद्धत स्वभाव वाले अपनी प्रतिष्ठा खो बैठते हैं।
अहंकार से भरा उद्धत व्यक्ति ज्ञानियों की संगति से भी कोई लाभ नहीं उठा पाता।
Udaar ↔ अनुदार
उदार हृदय वाले लोग सर्वकल्याण सोचते हैं जबकि अनुदार व्यक्ति केवल अपने स्वार्थ तक सीमित रहते हैं।
अनुदार दृष्टिकोण समाज को बांटता है, जबकि उदार हृदय सबको अपना बना लेता है।
Ugra ↔ शांत
उग्र रूप धारण किए बिना भी शांत और सौम्य वाणी से कठिन समस्याओं का समाधान हो सकता है।
शांत समुद्र में यात्रा सुखद होती है जबकि अशांत लहरों में जहाज डगमगाने लगता है।
Saumya ↔ उग्र
माता का सौम्य स्वभाव बालकों को सुरक्षा और स्नेह का संबल देता है।
उग्र स्वभाव व्यक्ति के विवेक को नष्ट कर संबंधों में कड़वाहट घोल देता है।
Udaaramana ↔ संकीर्णमना
उदारमना व्यक्ति सभी धर्मों का आदर करता है, संकीर्णमना द्वेष पालता है।
संकीर्णमना व्यक्ति कभी विशाल समाज का नेतृत्व नहीं कर सकता, उदारता ही सम्मान दिलाती है।
Utsaahi ↔ अनुत्साही
उत्साही युवा हर चुनौती को अवसर बना लेते हैं।
अनुत्साही सैनिक सेना के मनोबल को गिरा देता है, उत्साह ही विजय की कुंजी है।
Ureen ↔ ऋणी
माता-पिता के उपकारों से उऋण होना किसी भी संतान के लिए असंभव है।
माता-पिता के पावन उपकारों का मनुष्य आजीवन ऋणी रहता है जिसे चुकाना असंभव है।
Kanjoos ↔ उदार
कंजूस व्यक्ति आवश्यकता पड़ने पर भी खर्च नहीं करता।
उदार हृदय वाले लोग सर्वकल्याण सोचते हैं जबकि अनुदार व्यक्ति केवल अपने स्वार्थ तक सीमित रहते हैं।
Uday ↔ अस्त
सूर्य का पूर्व में उदय और पश्चिम में अस्त होना प्रकृति का अटल नियम है।
शाम को सूर्य अस्त होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौटने लगते हैं।
Utthaan ↔ पतन
परिश्रम और एकता राष्ट्र के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करते हैं जबकि आपसी फूट पतन लाती है।
अहंकार बड़े-बड़े साम्राज्यों के पतन का प्रमुख कारण बना है।
Unnati ↔ अवनति
शिक्षा और विज्ञान में उन्नति करने वाला देश कभी अवनति के गर्त में नहीं गिरता।
आलस्य और कुप्रबंधन व्यापार को अवनति की ओर धकेल देते हैं।
Nakad ↔ उधार
दुकानदार ने नकद भुगतान पर छूट दी, उधार पर माल देने से मना कर दिया।
उधार लेना आसान है, किंतु उसे समय पर चुकाना ही सच्ची साख बनाता है।
Chadhaav ↔ उतार
जीवन में उतार और चढ़ाव स्वाभाविक हैं, दोनों में समभाव रखना ही योग है।
कठिन पहाड़ी रास्ते पर तीव्र उतार के समय वाहन की गति नियंत्रित रखनी चाहिए।
Bhojana ↔ उपवास
दोपहर के समय परिवार के सभी सदस्यों ने एक साथ बैठकर प्रेमपूर्वक भोजन किया।
शारीरिक शुद्धि और संयम के उद्देश्य से उन्होंने सप्ताह में एक दिन उपवास रखने का नियम बनाया।
Usha ↔ संध्या
उषा की लालिमा नभ में बिखरते ही संपूर्ण प्रकृति में नवचेतना का संचार हो जाता है।
संध्या होते ही पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौट आते हैं जिन्हें वे प्रभात में छोड़ गए थे।
Udayachal ↔ अस्ताचल
सूर्य उदयाचल पर उदित होकर दिनभर आलोक बिखेरने के पश्चात अस्ताचल की ओर प्रस्थान करता है।
अस्ताचलगामी सूर्य की रश्मियां शांत सरोवरों पर मनोहारी प्रतिबिंब रचती हैं।
Uttar ↔ दक्षिण
ध्रुवतारा सदा उत्तर दिशा में चमकता है, जिसके विपरीत दक्षिण दिशा स्थित होती है।
हिमालय भारत के उत्तर में और हिंद महासागर दक्षिण दिशा में स्थित है।
Udeechi ↔ अवाची
उदीची से बहती बर्फीली बयार ने अवाची की उष्णता को शीतलता में रूपांतरित कर दिया।
शास्त्रों में उदीची और अवाची को क्रमशः उत्तर और दक्षिण दिशा का द्योतक माना गया है।
Upatyaka ↔ अधित्यका
पहाड़ की तलहटी वाली भूमि को उपत्यका और शिखर पर समतल भूमि को अधित्यका कहते हैं।
अधित्यका पर ठंडी और तीव्र हवाएं चलती हैं, जबकि उपत्यका में जलवायु मृदुल रहती है।
Urvar ↔ ऊसर
गंगा के मैदानों की उर्वर मिट्टी में प्रचुर अन्न उपजता है, जबकि ऊसर भूमि में तिनका भी नहीं उगता।
कठिन परिश्रम और वैज्ञानिक तकनीकों से किसान ऊसर भूमि को भी उर्वर बना देते हैं।
Upjaaoo ↔ बंजर
उपजाऊ मिट्टी देश की खाद्य सुरक्षा का आधार है, जिसे बंजर होने से बचाना हमारा कर्तव्य है।
सिंचाई की समुचित व्यवस्था होने पर बंजर जमीन भी उपजाऊ खेत में तब्दील हो जाती है।
Ushna ↔ शीतल
रेगिस्तान की उष्ण हवाओं के मध्य शीतल जल का झरना किसी वरदान से कम नहीं लगता।
पर्वतों से बहती शीतल बयार थके हुए यात्रियों की उष्ण थकान को पलभर में हर लेती है।
Udgam ↔ संगम
गंगा का उद्गम गंगोत्री हिमनद से होता है और प्रयागराज में उसका त्रिवेणी संगम दर्शनीय है।
पर्वतों से निकली नदियां जब पावन संगम पर मिलती हैं तो वह तीर्थ बन जाता है।
Muhaana ↔ उद्गम
पर्वतों से निकलने वाला नदी का उद्गम संकरा होता है, किंतु समुद्र के निकट उसका मुहाना अत्यंत चौड़ा होता है।
गंगा का उद्गम गंगोत्री हिमनद से होता है और प्रयागराज में उसका त्रिवेणी संगम दर्शनीय है।
Ulka ↔ स्थिर तारा
क्षणभर चमककर बुझने वाली उल्का की तुलना नभ के स्थिर तारा से कभी नहीं की जा सकती।
आकाश में क्षणभर चमककर बुझने वाली उल्का स्थिर तारा की शाश्वत दीप्ति की बराबरी नहीं कर सकती।
Upagrah ↔ ग्रह
चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है, जो निरंतर अपने ग्रह की परिक्रमा करता है।
ग्रहों का अपना प्रकाश नहीं होता, वे सूर्य जैसे नक्षत्रों के प्रकाश से चमकते हैं।
Utsah ↔ निरुत्साह
नवयुवकों का सच्चा उत्साह कठिन लक्ष्य को भी सुगम बना देता है।
निरंतर विफलता के कारण टीम में निरुत्साह फैलने लगा था।
Ullas ↔ अवसाद
विजय की घोषणा होते ही चारों ओर अपार उल्लास छा गया।
लगातार तनाव और असफलता व्यक्ति को गहरे अवसाद में धकेल सकती है।
Udweg ↔ शांतभाव
क्रोध और उद्वेग के क्षणों में लिया गया निर्णय प्रायः गलत साबित होता है।
योगी पुरुष हर परिस्थिति में शांतभाव धारण किए रहते हैं।
Kautuhal ↔ उदासीनता
वैज्ञानिक प्रयोगों के प्रति बच्चों का कौतूहल नई खोजों का बीज बोता है।
सामाजिक बुराइयों के प्रति उदासीनता बरतना नागरिकों को शोभा नहीं देता।
Sneh ↔ उपेक्षा
गुरुजनों का सच्चा स्नेह विद्यार्थियों के जीवन को प्रकाशमय बना देता है।
बुजुर्गों की उपेक्षा करना किसी भी सभ्य समाज के लिए अनुचित है।
Vatsalya ↔ उपेक्षा
माता-पिता का निस्वार्थ वात्सल्य संतान के सम्पूर्ण विकास का आधार है।
शिशुओं की उपेक्षा करने से उनका शारीरिक व मानसिक विकास बाधित होता है।
Mudit ↔ उदास
बच्चों की मीठी बातें सुनकर दादाजी का मन मुदित हो गया।
परीक्षा में मनचाहा फल न मिलने पर वह उदास बैठा रहा।
Ullasit ↔ विषण्ण
होली के पावन पर्व पर सारा गाँव उल्लसित रंगों में रंग गया।
पराजय के उपरांत राजा विषण्ण भाव से महल के कोने में बैठा रहा।
Utsahit ↔ हतोत्साहित
अध्यापक की प्रशंसा सुनकर छात्र नए प्रोजेक्ट के लिए और उत्साहित हो गया।
कठोर आलोचना से किसी भी परिश्रमी को हतोत्साहित नहीं करना चाहिए।
Jagrook ↔ उदासीन
जागरूक मतदाता ही लोकतंत्र की वास्तविक रीढ़ होते हैं।
पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर उदासीन बने रहना आत्मघाती है।
Utphull ↔ म्लान
सुखद वातावरण में बच्चों के चेहरे उत्फुल्ल कमल जैसे खिल उठे।
दुख की मार से पीड़ित व्यक्ति का मुखड़ा म्लान पड़ गया था।
Shantachitta ↔ उद्विग्न
शांतचित्त होकर कार्य करने से सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
भविष्य की अनिश्चितता से मन उद्विग्न और व्याकुल रहने लगा।
Uttejana ↔ प्रशांति
झूठी अफवाहों से समाज में अवांछित उत्तेजना फैल गई।
प्राकृतिक वातावरण में आत्मा को असीम प्रशांति मिलती है।
Udwignata ↔ प्रसन्नचित्तता
परीक्षा परिणाम से पूर्व छात्रों के मन में उद्विग्नता स्वाभाविक है।
ध्यान के अभ्यास से जीवन में प्रसन्नचित्तता बनी रहती है।
Hatash ↔ उत्साही
विपदाओं से घिरने पर भी हताश न होना ही सफलता का मूल मंत्र है।
उत्साही सैनिक दुर्गम पहाड़ियों पर भी मुस्कुराते हुए चढ़ गए।
Umang ↔ उदासी
वसंत ऋतु के आगमन पर युवाओं के मन में नई उमंग जाग उठती है।
बार-बार की असफलता से उसके चेहरे पर उदासी छा गई।