Naya ↔ पुराना
पुरानी परंपराओं को त्यागकर समाज ने नए विचारों को अंगीकार किया है।
पुराने अनुभव और नई सोच का संगम ही किसी भी कार्य में सफलता दिलाता है।
अक्षर 'न' से प्रारंभ होने वाले कुल 179 विपरीतार्थक शब्द युग्म (प्रदर्शित: 1–50):
Naya ↔ पुराना
पुरानी परंपराओं को त्यागकर समाज ने नए विचारों को अंगीकार किया है।
पुराने अनुभव और नई सोच का संगम ही किसी भी कार्य में सफलता दिलाता है।
Dhani ↔ निर्धन
धनी व्यक्ति यदि कृपण हो तो समाज में उसका सम्मान निर्धन ज्ञानी से कम ही होता है।
सच्चा दानी वह है जो निर्धन और असहाय लोगों की पीड़ा समझकर सहायता के लिए आगे आए।
Shreshth ↔ निम्न
सत्कर्म करने वाला व्यक्ति समाज में श्रेष्ठ पद पाता है जबकि दुर्जन निम्न माना जाता है।
निम्न सोच मनुष्य के व्यक्तित्व को संकीर्ण बना देती है, जबकि श्रेष्ठ विचार उसे ऊंचा उठाते हैं।
Utkrisht ↔ निकृष्ट
कलाकार ने उत्कृष्ट कृति का सृजन किया, जिसे देखकर निकृष्ट नकलची भी दंग रह गए।
निकृष्ट आचरण किसी भी उच्च कुल के व्यक्ति को भी कलंकित कर देता है।
Puraatan ↔ नूतन
पुरातन रूढ़िवादिता को छोड़कर नूतन प्रगतिशील सोच अपनाना ही विकास का मूलमंत्र है।
वसंत में प्रकृति नूतन परिधान धारण कर हरियाली और नवऊर्जा से भर उठती है।
Sajeev ↔ निर्जीव
चित्रकार ने कैनवास पर ऐसा सजीव चित्र बनाया कि निर्जीव पत्थर भी बोलते नजर आए।
निर्जीव पत्थरों में भी मूर्तिकार अपनी छेनी से सजीव भाव उकेर देता है।
Balwaan ↔ निर्बल
सच्चा बलवान वही है जो निर्बल को सहारा देकर अपने बल का सदुपयोग करे।
निर्बल को सताने वाला कभी वास्तविक शांति और ईश्वर की कृपा प्राप्त नहीं कर सकता।
Saakaar ↔ निराकार
भक्त अपने आराध्य के साकार रूप की उपासना करते हैं, जबकि दार्शनिक निराकार ब्रह्म का चिंतन करते हैं।
भक्त साकार रूप में ईश्वर का ध्यान करते हैं, जबकि ज्ञानी निराकार ब्रह्म की अनुभूति करते हैं।
Saguna ↔ निर्गुण
सूरदास जी ने सगुण कृष्ण भक्ति का गान किया, वहीं कबीरदास जी ने निर्गुण राम की आराधना की।
निर्गुण संत कबीर ने परमात्मा को समस्त उपाधियों से परे एक रस माना है।
Nashwar ↔ अनश्वर
यह भौतिक शरीर नश्वर है, किंतु इसके भीतर स्थित चेतना अनश्वर और अमर है।
पार्थिव देह नश्वर है, किंतु उसमें विद्यमान आत्मतत्व अनश्वर और अविनाशी है।
Namra ↔ उद्दंड
नम्र स्वभाव के व्यक्ति की सब प्रशंसा करते हैं जबकि उद्दंड व्यवहार सभी को अखरता है।
उद्दंड आचरण छात्र की प्रतिष्ठा को धूमिल करता है, जबकि नम्र स्वभाव उसे सबका प्रिय बनाता है।
Dayalu ↔ निर्दयी
दयालु राजा अपनी प्रजा पर कृपा करता है जबकि निर्दयी शासक केवल अत्याचार ढहाता है।
निर्दयी शिकारी बेजुबान पशुओं पर अत्याचार करते समय किंचित भी संकोच नहीं करता।
Asli ↔ नकली
असली हीरे की चमक सदा बनी रहती है, जबकि नकली आभूषण जल्द ही फीके पड़ जाते हैं।
नकली मोतियों की चमक कुछ ही दिनों में फीकी पड़ जाती है, असली रत्न सदा दमकता है।
Sakriya ↔ निष्क्रिय
स्वास्थ्य के लिए सक्रिय जीवनशैली आवश्यक है, निष्क्रिय पड़े रहने से बीमारियां घेर लेती हैं।
निष्क्रिय रहकर केवल भाग्य के भरोसे बैठने से जीवन में कोई उपलब्धि हासिल नहीं होती।
Nipun ↔ अनिपुण
धनुर्विद्या में निपुण अर्जुन ने लक्ष्य पर अचूक संधान किया।
कला के क्षेत्र में निरंतर साधना ही अनिपुण शिक्षार्थी को कुशल कलाकार बनाती है।
Nyoon ↔ अधिक
खर्च को न्यूनतम रखना चाहिए और बचत को अधिक से अधिक बढ़ाना चाहिए।
किसी भी वस्तु का अधिक उपभोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।
Saras ↔ नीरस
कवि का काव्य अत्यंत सरस था, कोई भी श्रोता उसे नीरस नहीं कह सका।
नीरस व्याख्यान श्रोताओं को ऊब से भर देता है, उसमें रोचक उदाहरण होने चाहिए।
Nyaayee ↔ अन्यायी
न्यायी न्यायाधीश पक्षपात नहीं करता, अन्यायी शासक का पतन अवश्यंभावी है।
अन्यायी शासक की सत्ता भले ही प्रचंड दिखे, किंतु अंततः उसका पतन निश्चित होता है।
Aastik ↔ नास्तिक
आस्तिक व्यक्ति ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास रखता है जबकि नास्तिक वैज्ञानिक तर्क मांगता है।
नास्तिक व्यक्ति ईश्वरीय सत्ता को अस्वीकार कर केवल प्रत्यक्ष प्रमाण पर विश्वास करता है।
Saarvajanik ↔ निजी
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना हर नागरिक का परम धर्म है।
निजी स्वार्थ को त्यागकर सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देना ही महानता है।
Sachest ↔ निश्चेष्ट
दवा लगते ही मरीज सचेष्ट हो उठा, पहले वह निश्चेष्ट पड़ा था।
संकट के समय निश्चेष्ट बैठने के बजाय सक्रिय होकर समाधान खोजना चाहिए।
Nirmaan ↔ विनाश
राष्ट्र के निर्माण में वर्षों लग जाते हैं, जबकि विनाश कुछ ही पलों में हो सकता है।
युद्ध केवल विनाश और संहार लाता है, शांति में ही लोक-कल्याण का निर्माण संभव है।
Prashansa ↔ निंदा
सच्चे मित्र सामने प्रशंसा करने के बजाय पीठ पीछे भी निंदा नहीं करते।
निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय — कबीरदास जी के अनुसार निंदा करने वाला व्यक्ति सुधारक होता है।
Stuti ↔ निंदा
भक्त प्रभु की स्तुति करते हैं और अहंकार की निंदा करते हैं।
निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय — कबीरदास जी के अनुसार निंदा करने वाला व्यक्ति सुधारक होता है।
Maalik ↔ नौकर
सच्चा मालिक वही है जो नौकर के श्रम का यथोचित पारिश्रमिक समय पर दे।
नौकर की ईमानदारी देखकर मालिक ने उसे अपने व्यापार का प्रबंधक बना दिया।
Aayaat ↔ निर्यात
देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आयात कम और निर्यात अधिक करना चाहिए।
भारतीय मसालों का विदेशों में बड़े पैमाने पर निर्यात होता है।
Nakad ↔ उधार
दुकानदार ने नकद भुगतान पर छूट दी, उधार पर माल देने से मना कर दिया।
उधार लेना आसान है, किंतु उसे समय पर चुकाना ही सच्ची साख बनाता है।
Naagarik ↔ ग्रामीण
नागरिक सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण अंचलों तक पहुंचना आवश्यक है।
ग्रामीण जीवन की शांति और शुद्ध वायु शहरों की भागदौड़ में नहीं मिलती।
Niyam ↔ अनियम
यातायात के नियमों का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
दैनिक जीवन में अनियम और अनियमितता स्वास्थ्य तथा कार्य दोनों को बिगाड़ देती है।
Vidhi ↔ निषेध
शास्त्रों में शुभ कार्यों के लिए विधि और पापकर्मों के लिए निषेध बताया गया है।
अस्पतालों में धूम्रपान पूर्णतः निषेध है।
Pravesh ↔ निकास
सभागार में प्रवेश के लिए अलग द्वार था और निकास के लिए दूसरा मार्ग।
वर्षा के जल का उचित निकास न होने से गलियों में पानी भर गया।
Nar ↔ नारी
राष्ट्र के निर्माण में नर और नारी दोनों का योगदान बराबर है।
नारी शक्ति का सम्मान ही किसी भी प्रगतिशील समाज का सच्चा मापदंड है।
Sharana ↔ निष्कासन
युद्धग्रस्त क्षेत्र से आए असहाय परिवारों को शरण देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
समाज विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर अपराधी का मोहल्ले से निष्कासन कर दिया गया।
Nirvaasana ↔ पुनर्वास
तानाशाह शासक ने अपने राजनीतिक विरोधियों को देश से निर्वासन की क्रूर सजा सुनाई।
बाढ़ पीड़ितों के लिए शासन ने सुरक्षित स्थल पर नए घरों का निर्माण कर पुनर्वास कराया।
Roodhi ↔ नवाचार
बिना सोचे-समझे पुरानी रूढ़ि को ढोते रहने से समाज की प्रगति अवरुद्ध हो जाती है।
कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में नए नवाचार अपनाने से ग्रामीण जीवन में क्रांति आ गई है।
Nivaasa ↔ प्रवास
अवकाश प्राप्त करने के उपरांत उन्होंने अपने पैतृक गांव में स्थायी निवास बना लिया।
उच्च शिक्षा और रोजगार के सिलसिले में युवाओं को वर्षों तक परदेस में प्रवास करना पड़ता है।
Aahaara ↔ निराहार
शारीरिक ऊर्जा बनाए रखने के लिए समय पर सुपाच्य और पौष्टिक आहार लेना आवश्यक है।
एकादशी के पावन पर्व पर श्रद्धालु पूरे दिन निराहार रहकर ईश्वर का ध्यान करते हैं।
Aparaadhee ↔ निरपराधी
न्यायालय ने साक्ष्यों की जांच के उपरांत उस शातिर ठग को अपराधी घोषित कर जेल भेज दिया।
सच्चे न्याय का सिद्धांत यही है कि किसी भी निर्दोष व निरपराधी को सजा न मिले।
Registaan ↔ नखलिस्तान
धधकते रेगिस्तान के मध्य हरा-भरा नखलिस्तान थके यात्रियों को अमृत तुल्य शांति देता है।
नखलिस्तान में खजूर के पेड़ और मीठे पानी का स्रोत मरुभूमि के यात्रियों का संबल बनता है।
Naaisargik ↔ कृत्रिम
कश्मीर की घाटियों में नैसर्गिक सौंदर्य बिखरा पड़ा है, जिसकी तुलना किसी कृत्रिम रचना से नहीं हो सकती।
कृत्रिम सुगंध कुछ ही देर टिकती है, जबकि प्राकृतिक फूलों की महक वातावरण को महकाए रखती है।
Dinkar ↔ निशाकर
दिनकर के उदय होते ही निशाकर की चांदनी आकाश में विलीन हो जाती है।
आकाश में निशाकर अपनी शीतल रश्मियों से धरती को शांत करता है जब दिनकर अस्त होता है।
Tarang ↔ निस्तब्धता
सरोवर में पत्ता गिरने से तरंग उठती है, जबकि बिना हलचल के उसमें निस्तब्धता छाई रहती है।
गहरे वन में रात के समय छाई निस्तब्धता को केवल दूर बहती नदी की कलकल ध्वनि तोड़ती है।
Pawan ↔ निर्वात
धरती के वायुमंडल में जीवनदायिनी पवन बहती है, जबकि अंतरिक्ष में निर्वात की स्थिति होती है।
प्रकाश की किरणें निर्वात में भी गमन कर सकती हैं, किंतु ध्वनि को संचरण हेतु वायु चाहिए।
Nirvaat ↔ वायु
प्रकाश की किरणें निर्वात में भी गमन कर सकती हैं, किंतु ध्वनि को संचरण हेतु वायु चाहिए।
अंतरिक्ष के शून्य निर्वात में जीवन संभव नहीं, धरती की सघन वायु ही श्वास देती है।
Ishaan ↔ नैऋत्य
वास्तुशास्त्र में ईशान कोण को अत्यंत शुभ और नैऋत्य कोण को स्थिरता का सूचक माना गया है।
नैऋत्य दिशा से आने वाले दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी बादल संपूर्ण उपमहाद्वीप में वर्षा लाते हैं।
Nirmalta ↔ मलिनता
पर्वतीय झरनों के जल की निर्मलता मन मोह लेती है, जिसे औद्योगिक कचरे की मलिनता से बचाना आवश्यक है।
नदियों में अपशिष्ट बहाने से जल में मलिनता बढ़ जाती है और जलीय जीवन संकट में पड़ जाता है।
Nirjhar ↔ स्थिर जल
चट्टानों को चीरकर बहता कलकल निर्झर गति का प्रतीक है, जबकि शांत सरोवर विश्राम का।
पहाड़ों का चंचल निर्झर बहकर अंततः घाटी के शांत स्थिर जल में विश्राम पाता है।
Nakshatra ↔ ग्रह
आकाश में नक्षत्र अपनी स्थिति पर स्थिर रहते हैं, जबकि ग्रह सूर्य की परिक्रमा में गतिशील रहते हैं।
ग्रहों का अपना प्रकाश नहीं होता, वे सूर्य जैसे नक्षत्रों के प्रकाश से चमकते हैं।
Asha ↔ निराशा
कठिन से कठिन समय में भी आशा की एक किरण जीवन को नई दिशा देती है।
असफलता से घबराकर निराशा के अंधकार में डूबना उचित नहीं है।
Utsah ↔ निरुत्साह
नवयुवकों का सच्चा उत्साह कठिन लक्ष्य को भी सुगम बना देता है।
निरंतर विफलता के कारण टीम में निरुत्साह फैलने लगा था।